Subedaar Movie Review in Hindi: अनिल कपूर की नई फिल्म ‘सूबेदार’ (Subedaar) अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म में एक रिटायर्ड फौजी और अवैध रेत माफिया के बीच के घमासान की कहानी दिखाई गई है.
Subedaar Movie Storyline in Hindi: सूबेदार फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी एक छोटे से शहर की है, जहाँ रेत माफिया का आतंक पनप रहा है. फिल्म का लीड हीरो आदित्य मौर्य यानि कि अनिल कपूर एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर है, जो अपनी पत्नी को खोने के गम और बेटी श्यामा यानि कि राधिका मदान के साथ अपने बिगड़े रिश्तों को सुधारने की निरंतर कोशिश करता रहता है.
दूसरी ओर है प्रिंस यानि कि आदित्य रावल, एक घमंडी और बिगड़ैल इंसान है जिसे अपनी सौतेली बहन और खूंखार माफिया लीडर बबली दीदी यानि कि मोना सिंह का संरक्षण मिला हुआ है. जब आदित्य और प्रिंस के ‘ईगो’ आपस में टकराते हैं, तो यह संघर्ष एक खतरनाक हिंसक मोड़ ले लेता है. इन दोनों का टकराव कैसे होता है और आगे क्या होता है? जानने के लिए आपको ये पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी.
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सूबेदार फिल्म के प्लस पॉइंट्स
- दमदार एक्टिंग: अनिल कपूर ने ‘एंग्री ओल्ड मैन’ के रोल में बेहतरीन काम किया है. एक अनुशासित सिपाही और एक दुखी पिता के बीच के संतुलन को उन्होंने बखूबी निभाया है. आदित्य रावल ने एक सनकी विलेन के रूप में अपनी गहरी छाप छोड़ी है. इनके अलावा सौरभ शुक्ला, मोना सिंह और फैजल मलिक जैसे सितारों ने अपनी छोटी लेकिन अहम भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.
- फिल्म का टॉपिक: फिल्म अवैध रेत खनन और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक को छूती नजर आती है.
सूबेदार फिल्म के नेगटिव पॉइंट्स
- कहानी में भटकाव: फिल्म एक साथ कई ट्रैक पर चलती है. पिता-बेटी का रिश्ता, माफिया का आतंक, कॉलेज में गुंडागर्दी. इतने सारे टॉपिक होने की वजह से कोई भी मुद्दा दर्शकों पर गहरा प्रभाव नहीं छोड़ पाता.
- इमोशनल ट्रिगर्स: फिल्म में लड़ाई की वजहें थोड़ी अजीब लगती हैं. मौर्य का गुस्सा अपनी पुरानी जिप्सी के लिए है, जबकि बबली दीदी की जिद अपनी माँ के गहनों से बनी रिवॉल्वर को लेकर होता है. ये बातें सिर्फ उतनी ही इमोशनल नहीं लगतीं जितनी स्क्रिप्ट में रही होंगी.
- कॉमेडी की कमी: फिल्म शुरू से लेकर आखिर तक बहुत ही गंभीर बनी रहती है. तनावपूर्ण सीन्स के बीच राहत देने वाले पलों या हल्के-फुल्के हास्य भरे डायलॉग्स की कमी खलती है.
- तकनीकी पहलू: ‘धुरंधर’ की तरह इस फिल्म को भी अलग-अलग चैप्टर्स में बांटा गया है. हालांकि, ये टाइटल कहानी को आगे ले जाने के बजाय महज हेडिंग्स की तरह नजर आते हैं. सुरेश त्रिवेणी का डायरेक्शन औसत है, जहाँ एक्शन तो अच्छा है लेकिन कहानी कहने का तरीका थोड़ा बोझिल सा लगता है.
निष्कर्ष
देखा जाए तो ‘सूबेदार’ इतनी बुरी फिल्म भी नहीं है, कि इसे एक बार भी ना देखा जाए. हालांकि यह एक ओवरक्राउडेड फिल्म जरूर है. अगर आप अनिल कपूर के फैन हैं और उनकी इंटेंस एक्टिंग को देखना पसंद करते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है. लेकिन अगर आप एक कसी हुई स्क्रिप्ट और गहरा प्रभाव छोड़ने वाली कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद यह आपको थोड़ा निराश कर सकती है.
Special Request:
दोस्तों, अगर आपने अनिल कपूर की फिल्म ‘सूबेदार’ (Subedaar) देख ली है तो बताइये आपको ये फिल्म कैसी लगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.