Ustaad Bhagat Singh Movie Review in Hindi: पवन कल्याण और डायरेक्टर हरीश शंकर की ब्लॉकबस्टर जोड़ी 14 साल बाद ‘उस्ताद भगत सिंह’ (Ustaad Bhagat Singh) के साथ वापस आ गई है. फैंस के बीच इस फिल्म को लेकर काफी अच्छा क्रेज देखने को मिल रहा था, खासकर पवन कल्याण के पुलिसिया अवतार और डांस नंबर्स को लेकर. ‘गब्बर सिंह’ जैसी कल्ट क्लासिक देने वाली जोड़ी जब दोबारा साथ आती है, तो उम्मीदें सातवें आसमान पर होती हैं.
लेकिन क्या ‘उस्ताद भगत सिंह’ दर्शकों की उन सभी उम्मीदों पर खरी उतरी है या नहीं? आइये इसके बारे में डिटेल में बात करते हैं.
Ustaad Bhagat Singh Movie Storyline in Hindi: उस्ताद भगत सिंह फिल्म की कहानी
कहानी शुरू होती है चंदाला मर्री नल्ला नागप्पा यानि कि पार्थिबन से जो तेलंगाना का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहा है और वर्तमान सीएम चंद्रशेखर राव यानि कि के.एस. रविकुमार की हत्या की साजिश रचता रहता है. इसी बीच, नागप्पा का बेटा नल्लामल्ला के जंगलों से रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाता है.
इसकी जांच होती है तो पता चलता है कि इसके पीछे ‘उस्ताद भगत सिंह’ यानि कि पवन कल्याण का हाथ होता है. आखिर उस्ताद भगत सिंह कौन है? नागप्पा से उसकी क्या दुश्मनी है? फिल्म देखने के बाद ही आपको इन सभी सवालों के जवाब मिल पाएंगे.

Ustaad Bhagat Singh Movie Review in Hindi
उस्ताद भगत सिंह फिल्म के प्लस पॉइंट्स
पवन कल्याण का पावर-पैक प्रदर्शन: पवन कल्याण अक्सर अपने सिग्नेचर स्टाइल और स्वैग के लिए जाने जाते हैं. एक्शन सीक्वेंस और डायलॉग डिलीवरी में वे लाजवाब हैं, जो उनके फैंस के लिए ये किसी ट्रीट से कम नहीं है.
स्टार पॉवर: ‘थॉली प्रेमा’ के मशहूर गाने “ई मनासे” का रिक्रिएशन और ‘महांकाली फाइट’ सीक्वेंस फिल्म के सबसे बड़े हाई और प्लस पॉइंट्स हैं. यहाँ पवन कल्याण का रफ-एंड-टफ लुक काफी दमदार नजर आता है.
पार्थिबन और श्रीलीला: विलेन के रूप में पार्थिबन ने काफी शांत और सधा हुआ अभिनय किया है. श्रीलीला स्क्रीन पर बेहद खूबसूरत लगी हैं और कुछ सीन्स में उनकी चमक साफ नजर आती है.
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उस्ताद भगत सिंह फिल्म के नेगटिव पॉइंट्स
कमजोर और अनुमानित कहानी: हरीश शंकर ने कहानी से ज्यादा हीरो को ऊंचा और बेहतर दिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया है. फिल्म की कहानी काफी पुरानी और प्रेडिक्टेबल लगती है, जिसमें नयापन तो बिल्कुल नहीं है.
स्लो फर्स्ट हाफ: फिल्म की शुरुआत काफी कमजोर है. कॉमेडी सीन्स कई जगह जबरदस्ती ठूंसे हुए लगते हैं और कहानी ट्रैक पर आने में काफी टाइम लगाती है.
सितारों के दुरूपयोग: राव रमेश, गौतमी और राशि खन्ना जैसे टैलेंटेड एक्टर्स के पास करने के लिए कुछ नहीं था, जबकि स्क्रीन पर इन्हें और भी मौका दिया जाना चाहिए था. राशि खन्ना के करैक्टर ने तो पूरी तरह निराश किया है.
म्यूजिक: एस. थमन का म्यूजिक इस बार आपको निराश करेगा. बैकग्राउंड स्कोर और गाने उनके पिछले म्यूजिक की याद दिलाते हैं और कोई भी नया प्रभाव नहीं छोड़ते.
तकनीकी पहलू: अयानंका बोस की सिनेमैटोग्राफी ठीक ठाक है, लेकिन एडिटिंग में और भी मेहनत करने की जरूरत थी. खासकर फर्स्ट हाफ में.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, ‘उस्ताद भगत सिंह’ एक औसतन कमर्शियल ड्रामा फिल्म है जो सिर्फ और सिर्फ पवन कल्याण के फैंस को ही पसंद आने वाली है. अगर आप पवन कल्याण के डाई हार्ट फैन हैं तो आपको ये फिल्म पसंद आ सकती है. लेकिन अगर फिल्म में कुछ नया देखने की कोशिश करेंगे तो आपको निराशा हाथ लगेगी.
Special Request:
दोस्तों, अगर आपने पवन कल्याण (Pawan Kalyan) की फिल्म ‘उस्ताद भगत सिंह’ (Ustaad Bhagat Singh) देख ली है तो बताइये आपको ये फिल्म कैसी लगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.