Karz Movie (1980): कहानी, Unknown Facts, Remakes और Box Office की पूरी कहानी, कैसे बनी Cult Classic?

Karz Movie (1980): कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिन्हें रिलीज के समय वह सफलता नहीं मिलती जिसकी उम्मीद की जाती है, लेकिन समय गुजरने के साथ वही फिल्में दर्शकों के दिल में खास जगह बना लेती हैं. ऋषि कपूर और सिमी गरेवाल स्टारर ‘कर्ज़’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है.

1980 में रिलीज हुई यह फिल्म सिर्फ पुनर्जन्म और बदले की कहानी नहीं थी, बल्कि इसमें म्यूजिक, सस्पेंस, रोमांस और थ्रिल का ऐसा मेल देखने को मिला, जिससे ये बाद में हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल हो गई.

दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के कई गाने आज भी पॉपुलर हैं और इसकी कहानी से इंस्पायर्ड होकर अलग-अलग भाषाओं में कई फिल्में बनाई गईं. तो आखिर Karz की कहानी क्या थी? रिलीज के समय फिल्म का प्रदर्शन कैसा रहा? इसके कितने Remakes बने और फिल्म से जुड़े कौन से ऐसे Facts हैं जो शायद आपको नहीं पता होंगे? आइए डिटेल में जानते हैं.

Karz Movie (1980): Story, Unknown Facts, Remakes, Box Office & Legacy

Karz Movie: फिल्म की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी रवि वर्मा से शुरू होती है. रवि एक अमीर, सफल और नेकदिल इंसान है, जिसकी शादी कामिनी से हुई है. उसे लगता है कि उसकी जिंदगी बिल्कुल परफेक्ट है और वह अपनी पत्नी पर पूरा भरोसा करता है. लेकिन रवि इस बात से अनजान है कि कामिनी की नजर उसके प्यार से ज्यादा उसकी दौलत पर है.

एक दिन कामिनी रवि की हत्या कर देती है और इस हत्या को हादसे का रूप देने की कोशिश करती है. उसे लगता है कि रवि की मौत के साथ उसके सारे राज हमेशा के लिए दफन हो जाएंगे. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

कई साल बाद रवि का पुनर्जन्म मोंटी के रूप में होता है. मोंटी एक पॉपुलर स्टेज सिंगर है और उसकी जिंदगी बेहद खुशहाल है. हालांकि धीरे-धीरे उसे कुछ ऐसी जगहों और घटनाओं से अजीब जुड़ाव महसूस होने लगता है, जिनका उसके वर्तमान जीवन से कोई संबंध ही नहीं है.

इसके बाद उसे अपने पिछले जन्म की यादें आने लगती हैं और धीरे-धीरे उसे पता चलता है कि वह कोई और नहीं बल्कि रवि वर्मा का पुनर्जन्म है. अब उसके सामने सिर्फ एक सवाल है—क्या वह अपनी पिछली जिंदगी के हत्यारों से बदला ले पाएगा? यही रहस्य फिल्म को आगे लेकर जाता है.

Karz का आइडिया कहां से आया था?

‘कर्ज़’ की कहानी को लेकर अक्सर 1975 की हॉलीवुड फिल्म The Reincarnation of Peter Proud का जिक्र किया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुभाष घई ने इस फिल्म के मूल आइडिया से प्रेरणा ली थी. हालांकि उन्होंने कहानी को भारतीय दर्शकों के हिसाब से काफी अलग रूप दिया और इसमें भारतीय पुनर्जन्म की अवधारणा के साथ मर्डर, बदला, म्यूजिक और थ्रिल को जोड़ा.

यही वजह है कि Karz को सिर्फ एक विदेशी फिल्म की कॉपी के तौर पर देखना सही नहीं होगा. फिल्म ने उस मूल विचार को लेकर अपनी अलग कहानी और पहचान बनाई.

Rishi Kapoor को ही क्यों चुना गया था?

‘कर्ज़’ से पहले सुभाष घई कालीचरण और विश्वनाथ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी पहचान बना चुके थे. उन फिल्मों में शत्रुघ्न सिन्हा मेन लीड में थे. लेकिन उस समय शत्रुघ्न सिन्हा कई फिल्मों में व्यस्त थे और उनकी डेट्स हासिल करना मुश्किल था.

ऐसे में सुभाष घई ने मोंटी के किरदार के लिए ऋषि कपूर को चुना. रिपोर्ट्स के मुताबिक, घई का मानना था कि मोंटी के किरदार में जिस मासूमियत, रोमांस और स्टार अपील की जरूरत थी, उसे ऋषि कपूर बेहतर तरीके से निभा सकते थे. और यही कास्टिंग आगे चलकर फिल्म की बड़ी ताकत बनी.

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Simi Garewal का नेगेटिव रोल बना यादगार

‘कर्ज़’ में सिमी गरेवाल ने कामिनी का किरदार निभाया था. शुरुआत में सिमी गरेवाल इस तरह का नेगेटिव किरदार करने को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुभाष घई को उन्हें इस रोल के लिए मनाने में काफी समय लगा. लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद यही किरदार उनके करियर के सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो गया.

कामिनी का शांत चेहरा और उसके पीछे छिपा लालच फिल्म की कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट पैदा करता है. सिमी गरेवाल को इस शानदार प्रदर्शन के लिए Filmfare Award for Best Supporting Actress भी मिला.

Karz का म्यूजिक बना फिल्म की जान

अगर ‘कर्ज़’ की सबसे बड़ी ताकत की बात करें तो वो था इस फिल्म का म्यूजिक. फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने दिया था, जबकि गाने आनंद बक्शी ने लिखे थे. वहीं कई पॉपुलर गानों को किशोर कुमार की आवाज ने खास पहचान दी.

फिल्म के पॉपुलर गाने –

ओम शांति ओम
दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर
एक हसीना थी
पैसा ये पैसा

ये सभी आज भी हिंदी सिनेमा के पॉपुलर गानों में गिने जाते हैं.

खास बात यह थी कि फिल्म का म्यूजिक सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं था. कई जगह गाने कहानी को आगे बढ़ाने और किरदारों की भावनाओं को दिखाने का काम भी करते हैं. लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल की जोड़ी को इस फिल्म के म्यूजिक के लिए Filmfare Award for Best Music Director भी मिला था.

‘Om Shanti Om’ के पीछे की दिलचस्प कहानी

‘ओम शांति ओम’ आज Karz की पहचान बन चुका था, लेकिन इसके रिकॉर्ड होने की कहानी भी काफी दिलचस्प बताई जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाने का शुरुआती रिकॉर्डिंग वर्जन लक्ष्मीकांत जी की आवाज में तैयार किया गया था. लेकिन सुभाष घई चाहते थे कि इसे किशोर कुमार ही गाएं.

किशोर कुमार उस समय काफी बीजी थे. ऐसे में उन्हें गाना सुनाने और इसके लिए मनाने की कोशिश की गई. आखिरकार किशोर कुमार ने गाना गाया और ‘ओम शांति ओम’ आगे चलकर फिल्म के सबसे बड़े आइकॉनिक गानों में शामिल हो गया.

 

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क्या Karz रिलीज के समय Hit थी?

यहां फिल्म की कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है. आज भले ही Karz को एक Cult Classic माना जाता है, लेकिन रिलीज के समय इसे वैसी जबरदस्त सफलता नहीं मिली थी जिसकी उम्मीद की जा रही थी. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी बताई जाती है कि फिल्म के एक हफ्ते बाद मल्टीस्टारर फिल्म Qurbani रिलीज हुई थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया.

सुभाष घई ने भी बाद में एक इंटरव्यू में शुरुआती दौर से जुड़ा एक किस्सा बताया था, जब उन्होंने एक सिंगल स्क्रीन थिएटर में फिल्म की कम ऑक्यूपेंसी देखी थी.

लेकिन फिल्म के गाने लगातार पॉपुलर होते रहे. रेडियो से लेकर कैसेट और बाद में टेलीविजन तक ‘कर्ज़’ का म्यूजिक लोगों तक पहुंचता रहा. धीरे-धीरे दर्शकों ने फिल्म को दोबारा देखना शुरू किया और समय के साथ इसकी पॉपुलरता बढ़ती चली गई. यही वह सफर था जिसने Karz को एक Cult Classic बना दिया.

सुभाष घई ने ‘पैसा ये पैसा’ में खुद क्यों किया कैमियो?

फिल्म से जुड़ा एक मजेदार किस्सा ‘पैसा ये पैसा’ गाने से जुड़ा है. बताया जाता है कि गाने की शूटिंग के लिए जिस शख्स को बुलाया गया था, वह शूटिंग के दिन नहीं पहुंचा. समय बर्बाद होने से बचाने के लिए सुभाष घई ने खुद ही वह रोल करने का फैसला किया.

इसके बाद सुभाष घई अपनी फिल्मों में कैमियो करने के लिए भी पहचाने जाने लगे.

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‘दर्द-ए-दिल’ की कोरियोग्राफी भी था सुभाष घई का हाथ

‘दर्द-ए-दिल, दर्द-ए-जिगर’ की शूटिंग के समय कोरियोग्राफर उपलब्ध नहीं थे. ऐसे में सुभाष घई ने खुद गाने की कोरियोग्राफी संभालने का फैसला किया. शुरुआत में ऋषि कपूर को इस बात को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन था, लेकिन जब गाने का रिजल्ट सामने आया तो वह इससे काफी प्रभावित हुए.

बाद में Ram Lakhan के गाने ‘तेरा नाम लिया’ के दौरान भी सुभाष घई ने इसी तरह कोरियोग्राफी की जिम्मेदारी संभाली.

Karz के सेट पर Simi Garewal के साथ हुआ विवाद

फिल्म की शूटिंग के दौरान एक सीन को लेकर सिमी गरेवाल और सुभाष घई के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आई थीं. एक सीन में सिमी के किरदार को राज किरण की मां और बहन को घर से निकालना था. सिमी को लगा कि इस तरह के डायलॉग उनके किरदार को जरूरत से ज्यादा नेगेटिव बना देंगे.

मामला इतना बढ़ गया कि सुभाष घई ने शूटिंग रोकने और फिल्म बंद करने तक की बात कह दी. उस समय फिल्म की लगभग 75 प्रतिशत शूटिंग पूरी हो चुकी थी. बाद में दिग्गज अभिनेत्री दुर्गा खोटे ने दोनों के बीच मामला सुलझाने में मदद की. आखिरकार शूटिंग फिर शुरू हुई और वही किरदार बाद में सिमी गरेवाल के सबसे चर्चित किरदारों में शामिल हो गया.

Karz में दिखाया गया काली माता मंदिर का राज़

फिल्म में दिखाई देने वाला काली माता का मंदिर भी दर्शकों के बीच काफी पॉपुलर हुआ था. कहा जाता है कि फिल्म देखने के बाद कुछ दर्शक ऊटी में उस मंदिर को देखने तक पहुंच गए थे. लेकिन असलियत यह थी कि फिल्म में दिखाया गया मंदिर असली लोकेशन पर नहीं था. इसे मुंबई के एक स्टूडियो में सेट के रूप में तैयार किया गया था.

 

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प्रेमनाथ ने बिना डायलॉग बोले लोटी महफ़िल

फिल्म में प्रेमनाथ का किरदार भी काफी अलग था. उनका किरदार बोल नहीं सकता था और अपनी बात इशारों के जरिए समझाता था. इसके साथ एक दूसरा किरदार उनके इशारों का मतलब दर्शकों और बाकी किरदारों तक तक पहुंचाता था.

यही वजह थी कि प्रेमनाथ का किरदार बहुत कम डायलॉग्स के बावजूद यादगार बन गया.

Karz के कितने Remakes बने? – (Karz Remake List)

‘कर्ज़’ का प्रभाव सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं रहा. इसकी कहानी से प्रेरित होकर अलग-अलग भाषाओं में कई फिल्में बनीं.

1. Enakkul Oruvan – 1984

तमिल भाषा में बनी Enakkul Oruvan में कमल हासन मुख्य भूमिका में नजर आए थे. फिल्म का डायरेक्शन S. P. Muthuraman ने किया था. कहानी में पुनर्जन्म और बदले के मूल विचार को बरकरार रखते हुए तमिल ऑडियंस के हिसाब से बदलाव किए गए थे. लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कामयाब नहीं हो पाई.

2. Aatmabalam – 1985

तेलुगु फिल्म Aatmabalam में नंदमुरी बालकृष्ण लीड रोल में थे. फिल्म ने Karz की कहानी को तेलुगु सिनेमा के अंदाज में पेश किया. हालांकि ये फिल्म भी ज्यादा नहीं चली.

3. Yuga Purusha – 1989

कन्नड़ भाषा की Yuga Purusha में रविचंद्रन मुख्य भूमिका में थे. फिल्म पुनर्जन्म और बदले की कहानी पर आधारित थी और इसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला. इस फिल्म का म्यूजिक भी उस साल काफी पॉपुलर हुआ और बॉक्स ऑफिस पर ही ये फिल्म सफल रही.

4. Chances Are – 1989

Karz का प्रभाव भारतीय सिनेमा से बाहर भी चर्चा में रहा. हॉलीवुड फिल्म Chances Are को लेकर भी कई जगह इसे Karz से प्रेरित बताया गया है, हालांकि फिल्म और Karz के बीच समानताओं को लेकर अलग-अलग विचार मिलते हैं.

5. Baazi – 2001

ओड़िया फिल्म Baazi भी Karz की कहानी से काफी हद तक मिलती-जुलती बताई जाती है. फिल्म में सिद्धांत महापात्रा मुख्य भूमिका में नजर आये थे.

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6. Om Shanti Om – 2007

Om Shanti Om को Karz को दिए गए सबसे बड़े बॉलीवुड Tributes में से एक माना जा सकता है. फिल्म का टाइटल ही Karz के आइकॉनिक गाने ‘ओम शांति ओम’ से लिया गया था. फिल्म की शुरुआत भी इसी गाने की शूटिंग से होती है और ऋषि कपूर – सुभाष घई कैमियो में नजर आते हैं. दोनों फिल्मों में प्यार, धोखा, मौत, पुनर्जन्म और बदले जैसे तत्व देखने को मिलते हैं. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी ब्लॉकबस्टर रही थी.

7. Mein Ek Din Laut Kay Aaoon Ga – 2007

पाकिस्तानी फिल्म Mein Ek Din Laut Kay Aaoon Ga को भी Karz से इंस्पायर्ड माना जाता है. हालांकि इसमें पुनर्जन्म की जगह नई पहचान और प्लास्टिक सर्जरी जैसे ट्विस्ट का इस्तेमाल किया गया था.

8. Karzzzz – 2008

करीब 28 साल बाद Karz की कहानी फिर से देखने को मिली. इस बार मेन रोल में नजर आये हिमेश रेशमिया. इस फिल्म का नाम भी Karzzzz ही था. फिल्म के म्यूजिक को कुछ दर्शकों ने पसंद किया, लेकिन एक्टिंग और कहानी को लेकर इसकी काफी आलोचना हुई थी. सबसे बड़ी चुनौती यही भी थी कि Original Karz जैसा जादू दोबारा चलना उतना आसान भी नहीं था.

निष्कर्ष

Karz सिर्फ 1980 की एक फिल्म नहीं है. यह उस दौर की ऐसी फिल्म है जिसने पुनर्जन्म की कहानी को म्यूजिकल थ्रिलर और बदले के साथ जोड़कर एक अलग सिनेमेटिक एक्सपीरियंस दिया. ऋषि कपूर का मोंटी, सिमी गरेवाल की कामिनी और फिल्म का शानदार म्यूजिक आज भी इसे यादगार बनाता है.

शायद यही वजह है कि चार दशक से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी ‘ओम शांति ओम’ की धुन सुनते ही Karz की याद आ जाती है. कुछ फिल्में रिलीज के समय हिट होती हैं, कुछ फिल्में समय के साथ बड़ी होती जाती हैं. Karz उन्हीं फिल्मों में से एक है.

आपकी राय?

क्या आपको लगता है कि Karz अपने समय से काफी आगे की फिल्म थी? कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए.

Founder & Author : My name is Deepak Giri & I am from New Delhi, India. Filmi FryDay is your one stop shop for everything Entertainment.

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