Lenin Movie Review in Hindi: तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. कुछ समय पहले अपने पवन कल्याण की Ustaad Bhagat Singh आई थी जिसमे हीरो को अनाथ दिखाया था और उसे किसी दूसरे परिवार ने पाला. ठीक वैसा ही हालिया रिलीज अखिल अक्किनेनी स्टारिंग Lenin में भी दिखाया गया है. खैर अखिल की फिल्म लेनिन में क्या देखने लायक है और क्या नहीं? आइये डिटेल में बात कर लेते हैं.
Lenin Movie Storyline in Hindi: लेनिन फिल्म की कहानी
Lenin फिल्म की स्टोरीलाइन के बारे में बात कें तो ये एक रिवेंज ड्रामा फिल्म है, जिसकी शुरुआत महाभारत की द्रौपदी से जुड़ी एक कहानी के साथ होती है. यही कहानी चित्तूर जिले के एक गांव में हर साल आयोजित होने वाले भारतम मिट्ठम उत्सव की परंपरा बन जाती है. इसके बाद कहानी पहुँचती है साल 2001 में, जहां जेल से रिहा हुआ लेनिन यानि कि अखिल अक्किनेनी अपने पुराने हिसाब चुकता करने लौटता है.
लेनिन जेल क्यों गया था? उसकी लव स्टोरी क्या है? बदला लेने की वजह क्या है और वो इसे पूरा कैसे करता है? फिल्म में ही आपको इन सभी सवालों के जवाब मिलने वाले हैं.
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Lenin Movie Review in Hindi
लेनिन फिल्म में क्या है खास?
फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी अच्छा है और तेजी से आगे बढ़ता है. गांव का माहौल, मंदिर का उत्सव और अलग-अलग किरदारों के बीच चल रही खींचातानी लगातार कहानी को रोचक बनाए रखती है. फिल्म के हर किरदार की एक अलग कहानी दिखाई गई है जोकि धीरे-धीरे अपनी परतें खोलते हैं. यही वजह है कि फिल्म लगातार ऑडियंस के लिए रोचक बनी रहती है.
फिल्म के कई किरदार महाभारत से मेल खाते हैं जिसकी वजह से ऑडियंस इनसे जुड़ जाती है. फिल्म की सबसे बड़ी खूबी ये भी है कि इसमें लगातार ट्विस्ट आते रहते हैं जिससे इंटरवल तक का सफ़र कब खत्म हो जाता है पता ही नहीं चलता.
स्टार परफॉरमेंस की बात करें तो अखिल अक्किनेनी ने ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले किरदार में बेहतर काम किया है. रोमांटिक सीन्स हो या फिर इमोशनल सीन, अखिल सभी में दमदार लगे हैं. जरूरत से ज्यादा एक्शन भी फिल्म में देखने को नहीं मिलते हैं.
फिल्म का सिनेमैटोग्राफी काफी अच्छी है जिसमे गांव और मंदिर उत्सव को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है.
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लेनिन फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
फिल्म में कई बार नए ट्विस्ट देखने को मिलते हैं जोकि कई बार तो ऑडियंस को चौंकाते हैं और अच्छा भी लगता है. लेकिन जब ये हद से ज्यादा बार हो तो कहने फिर उलझी हुई लगने लगती है. फर्स्ट में कई किरदार अपनी जबरदस्त छाप छोड़ते हैं लेकिन सेकंड हाफ में उन्हें ज्यादा मौका नहीं दिया गया. जैसा कि फीमेल लीड जोकि फर्स्ट हाफ में बेहतर नजर आती है, आखिर तक वो हीरो के लिए सिर्फ मोटिवेशन बनकर रह जाती है.
विलेन की एंट्री इंटरवल के बाद होती. हालांकि फिल्म देखते हुए इसके बारे में आपको पहले ही अंदाजा लग जायेगा. क्लाइमैक्स के आते-आते फिल्म की कहानी हमेशा की तरह एक पारंपरिक तेलुगु रिवेंज ड्रामा में बदल जाती है. विलेन का किरदार आखिर तक आते-आते अचानक से कमजोर पड़ जाता है.
क्लाइमैक्स में एक और ट्विस्ट देखने को मिलेगा जिसे देखकर कुछ लोगों को अच्छा लग सकता है लेकिन वास्तव में ये फिल्म की लेंथ को और भी बढ़ा देता है.
थमन एस का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा जरूर है लेकिन कुछ रोमांटिक गाने कहानी की रफ्तार को धीमा कर देते हैं.
फाइनल वर्डिक्ट
Lenin एक ऐसी फिल्म है जिसका फर्स्ट हाफ दमदार है जिसमे कई टर्न और ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखते हैं लेकिन सेकंड हाफ रिवेंज ड्रामा बनकर रह गया है जो काफी लोगों को पसंद नहीं आएगा. अब आप ही फैसला कीजिये कि आपको ये फिल्म देखनी है या फिर नहीं?
अगर आपने अखिल की फिल्म Lenin देख ली है तो बताइये आपको इनकी परफॉर्मेंस कैसी लगी और आप इस फिल्म को 5 में से कितने स्टार देंगे?