Tuner Movie Review in Hindi: यूनिक कांसेप्ट के साथ रिलीज हुई ट्यूनर, देखें या नहीं?

Tuner Movie Review in Hindi: हॉलीवुड की ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री ‘नवाल्नी’ (Navalny) के डायरेक्टर डैनियल रोहर (Daniel Roher) इस बार एक बेहद अनोखा और दिलचस्प क्राइम-थ्रिलर सिनेमा लेकर आए हैं. ‘द व्हाइट लोटस’ फेम अभिनेता लियो वुडॉल और सिनेमाजगत के दिग्गज डस्टिन हॉफमैन स्टारर फिल्म ‘ट्यूनर’ (Tuner) भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. यह फिल्म एक ऐसी बीमारी की कहानी है, जो एक कलाकार के लिए अभिशाप बनती है लेकिन अपराधियों के लिए एक बड़ा ‘हथियार’.

Tuner Movie Storyline in Hindi: ट्यूनर फिल्म की कहानी

कहानी निकी व्हाइट यानि लियो वुडॉल की है, जो एक पियानो ट्यूनर है और अपने दिवंगत पिता के दोस्त हैरी होरोविट्ज़ यानि कि डस्टिन हॉफमैन के यहाँ काम सीखता है. निकी कभी एक बेहद प्रतिभाशाली पियानोवादक (Pianist) था, लेकिन ‘हाइपरएक्यूसिस’ (Hyperacusis) नाम की एक दुर्लभ बीमारी की वजह से उसे पियानो छोड़ना पड़ा. इस बीमारी में इंसान के कान आम आवाजों के प्रति भी बेहद संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे निकी को हर वक्त कानों में एक विशेष सुरक्षा कवच (Ear Protection) पहनना पड़ता है.

हालांकि, इस बीमारी ने निकी को एक ‘सुपरपावर’ जैसी सुनने की शक्ति भी दी है. एक दिन जब हैरी अपनी तिजोरी का कॉम्बिनेशन कोड भूल जाता है, तो निकी अपनी इसी तेज सुनने की क्षमता से तिजोरी का लॉक क्रैक कर देता है. निकी अपनी इस कला को छुपा कर रखता है, लेकिन तभी उसकी जिंदगी में कुछ इजरायली चोरों की एंट्री होती है. निकी उनके लिए एक तिजोरी खोलता है.

गिरोह का लीडर उरी यानि कि लियोर राज, निकी के इस हुनर से दंग रह जाता है और उसे मोटी रकम के बदले अपने साथ काम करने का ऑफर देता है. हैरी के अस्पताल में होने और कर्ज के बोझ के कारण निकी इस दलदल में उतर जाता है. इसी बीच उसकी जिंदगी में रूथी यानि कि हवाना रोज़ लियू नाम की एक उभरती हुई पियानोवादक भी आती है. अब निकी आगे क्या करेगा? क्या वो इस दलदल से निकलेगा या इसमें और धंसता जायेगा? जानिए के लिए देखिये ट्यूनर.

Tuner Movie Watch Full Trailer

Passenger Movie Review in Hindi: इसे देखने के बाद आप हाईवे पर किसी की मदद नहीं करेंगे! विस्तार से जानें आखिर कैसी है फिल्म ‘पैसेंजर’?

Tuner Movie Review in Hindi

ट्यूनर फिल्म के प्लस पॉइंट्स

दमदार साउंड डिजाइन: फिल्म का साउंड डिजाइन इसकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है. डायरेक्टर डैनियल रोहर ने ऑडियंस को निकी की दिमागी दुनिया का अहसास कराने के लिए कमाल का काम किया है. जब पर्यावरण का शोर निकी को परेशान करता है, तो वो आवाजें दर्शकों को भी बेचैन करती हैं, और जिन दृश्यों में एकदम सन्नाटा दिखाया गया है, वे बहुत गहरा प्रभाव छोड़ते हैं.

स्टार कास्ट की एक्टिंग: लियो वुडॉल ने निकी के उलझे हुए और शांत किरदार को बेहद बारीकी से निभाया है. हवाना रोज़ लियू अपने किरदार में शानदार दिखी हैं और उनका कैरेक्टर ग्राफ काफी मजबूत है. दिग्गज अभिनेता डस्टिन हॉफमैन अपने छोटे से रोल में बेहद प्यारे लगे हैं, जबकि ‘फौदा’ फेम लियोर राज विलेन के रूप में पूरी तरह जमे हैं. दिग्गज अभिनेता जीन रेनो भी कैमियो करते नजर आये हैं.

क्रिएटिव सीन्स: निकी द्वारा पहली बार इजरायली गैंग की मदद करना, कोरियाई लोगों की तिजोरी खोलना और उरी के गैंग द्वारा निकी का अपहरण किए जाने वाले दृश्य काफी रोमांचक हैं जो दर्शकों पर अलग ही छाप छोड़ते हैं.

तकनीकी मामले में: लोवेल ए. मयेर की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है. VFX काफी आकर्षक हैं और ग्रेग ओ’ब्रायंट की एडिटिंग भी बेहतर है. विल बेट्स का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के सस्पेंस को बखूबी सपोर्ट करता है.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Leo Woodall (@leowoodall)

Ravi Mohan की LCU में धमाकेदार एंट्री, मुश्किल दौर में Lokesh Kanagaraj ने दी अपनी फिल्म ‘Benz’ में जगह, कहा— “Welcome to the Universe!”

ट्यूनर फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स

भटकती टाइमलाइन: फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका बार-बार बदलता मिजाज है. कभी यह फिल्म एक हल्की-फुल्की रोमांटिक लव स्टोरी लगने लगती है, तो कभी अचानक एक डार्क और वोइलेंस क्राइम थ्रिलर में बदल जाती है. यह बदलाव ऑडियंस को परेशान कर सकता है.

हीरो का मंजिल: कहानी में दिखाया गया है कि निकी हैरी के मेडिकल बिल चुकाने के लिए अपराध की दुनिया में जाता है, लेकिन धीरे-धीरे ऐसा लगने लगता है कि वह इस काम को एन्जॉय कर रहा है. इस वजह से ऑडियंस हीरो के प्रति वो सहानुभूति महसूस नहीं कर पाते जो होनी चाहिए थी. फिल्म का क्लाइमेक्स भी दर्शकों को थोड़ा भ्रमित करता है.

सबटाइटल्स की कमी: भारत में इस फिल्म को पीवीआर इनॉक्स पिक्चर्स द्वारा रिलीज किया गया है. आपको बता दें कि इस फिल्म में सबटाइटल्स (Subtitles) की कमी खलती है, जिससे कुछ इंग्लिश डायलॉग्स को पूरी तरह समझ पाना इंडियन ऑडियंस के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है.

निष्कर्ष

‘ट्यूनर’ एक यूनिक कांसेप्ट पर बनी फिल्म है जिसे सिर्फ इसके अनोखे टॉपिक और स्टार कास्ट की दमदार एक्टिंग की वजह से एक बार देखा जा सकता है. इंडिया में इसका काफी कम प्रोमोशन हुआ है इसलिए बॉक्स ऑफिस पर इसे ज्यादा कमायाबी मिलने के चांस काफी कम हैं.

Special Request:

दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि किसी इंसान की शारीरिक कमजोरी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है? ‘फौदा’ के विलेन लियोर राज और लियो वुडॉल की यह अनोखी जुगलबंदी देखने के लिए क्या आप सिनेमाघर जा रहे हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.

Founder & Author : My name is Deepak Giri & I am from New Delhi, India. Filmi FryDay is your one stop shop for everything Entertainment.

Leave a Comment