Passenger Movie Review in Hindi: हॉलीवुड की ‘द ऑटॉप्सी ऑफ जेन डो’ और ‘स्केरी स्टोरीज टू टेल इन द डार्क’ जैसी रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्मों के पॉपुलर डायरेक्टर आंद्रे ओवरेडल (André Øvredal) एक बार फिर ऑडियंस को डराने के लिए एक नया हॉरर सफर लेकर आए हैं. उनकी नई सर्वाइवल हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘पैसेंजर’ (Passenger) रिलीज हो चुकी है.
यह फिल्म एक सुनसान हाईवे पर शुरू होने वाले उस खौफनाक दास्तां को बयां करती है जिसके बारे में सोचकर भी डर लगता है. आइये जानते हैं आखिर कैसी है हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘पैसेंजर’?
View this post on Instagram
Passenger Movie Storyline in Hindi: पैसेंजर फिल्म की कहानी
कहानी टायलर यानि कि जैकब स्किपियो और मैडी यानि लू लोबेल की है, जो अपनी वैन में न्यूयॉर्क शहर से एक लंबे रोड ट्रिप पर निकलते हैं. सफर के दौरान टायलर मैडी को प्रपोज करता है और वह हां कर देती है. हालांकि, पिछले 6 हफ्तों से लगातार सड़क पर रहने के कारण मैडी थोड़ा घुटन महसूस कर रही है, जबकि टायलर इस एडवेंचर का पूरा लुत्फ उठा रहा है.
कहानी में खौफनाक मोड़ तब आता है, जब एक रात लुकास यानि कि माइल्स फाउलर नाम का एक शख्स अपनी कार से उनकी वैन के पास से बेहद तेज रफ्तार में गुजरता है और कुछ ही दूरी पर उसकी कार एक पेड़ से टकरा जाती है. टायलर और मैडी इंसानियत के नाते पुलिस को फोन करते हैं और लुकास की मदद के लिए वैन से बाहर आते हैं.
बस इसी पल से उनकी जिंदगी नर्क बन जाती है. उनकी वैन पर रहस्यमयी पंजों के निशान उभर आते हैं और मैडी को अपने आसपास किसी अदृश्य और खौफनाक साये का अहसास होने लगता है. क्या ये दोनों इस खौंफनाक मंजर से बाहर निकल पाते हैं? अगर हाँ, ये तो सब कैसे होता है/ जानने के लिए आपको ये पूरी फिल्म देखनी पड़ेगी.
Passenger Movie Watch Full Trailer
Passenger Movie Review in Hindi
पैसेंजर फिल्म के प्लस पॉइंट्स
बीजी टाइमलाइन: डायरेक्टर आंद्रे ओवरेडल ने फिल्म की लेंथ को सिर्फ 94 मिनट का रखकर समझदारी दिखाई है. फिल्म की शुरुआत बेहद चुस्त और मजेदार है जो आपको तुरंत कहानी से जोड़ लेती है. वह सीन बेहद शानदार और याद रहने वाला है जहाँ ये दोनों लवर एक प्रोजेक्टर पर फिल्म देख रहे होते हैं और तभी उन पर मुसीबत टूट पड़ती है. इसके अलावा फिल्म का क्लाइमेक्स भी काफी दमदार है.
दमदार सिनेमैटोग्राफी: फेडेरिको वेरार्डी की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है. फिल्म की शुरुआत में इस्तेमाल किया गया 360-डिग्री रिवॉल्विंग कैमरा वर्क ऑडियंस को पूरी तरह से उस खौफनाक माहौल के अंदर खींच लेता है. VFX से बनाये गए सीन भी बेहतरीन हैं.
सपोर्टिंग कास्ट: कैमियो किरदारों में माइल्स फाउलर और एलन ट्रोंग ने पूरी महफिल लूट ली है. वहीं ‘द पैसेंजर’ के रूप में जोसेफ लोपेज का अंदाज डरावना लगता है. दिग्गज अभिनेत्री मेलिसा लियो ने भी कास्ट को अच्छा सपोर्ट दिया है.
View this post on Instagram
पैसेंजर फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
स्लो कहानी: ज़ाचरी डोनोह्यू और टी डब्लू बर्गेस की लिखी कहानी में डर का माहौल तो अच्छा है, लेकिन इसका स्क्रीनप्ले कहीं-कहीं बेहद ही स्लो नजर आता है. ऐसा लगता है कि कहानी बार-बार एक ही ट्रैक पर चल रही है.
अधूरा बैकस्टोरी: मैडी और टायलर के अतीत को लेकर जो सस्पेंस बनाया गया था, उसे मेकर्स ने ठीक से नहीं समझाया, जिससे दर्शकों का मुख्य किरदारों से भावनात्मक जुड़ाव कम हो जाता है. शुरुआती रोमांच के बाद फिल्म का ‘डर’ थोड़ा फीका पड़ने लगता है.
लॉजिक की कमी: आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में जब टायलर वैन चलाने वाले दूसरे यात्रियों और वैन एक्सपर्ट ब्रैड फुलर से मिलता है, तो यह बात हजम नहीं होती कि किसी को भी इस ‘पैसेंजर’ के बारे में क्यों नहीं पता था. इंटरनेट के जमाने में ऐसी खौफनाक खबरें जंगल की आग की तरह फैलती हैं, लेकिन फिल्म में लोग इसके बारे में अनजान दिखते हैं, जो थोड़ा अजीब लगता है.
निष्कर्ष
‘पैसेंजर’ एक बेहद शानदार और डरावने प्लाट पर बनी फिल्म है, जिसमें कुछ सीन्स वाकई आपको पसंद आयेंगे. यदि आप हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और एक सस्पेंस-थ्रिलर रोड ट्रिप का मजा लेना चाहते हैं, तो कमजोरियों के बावजूद इसे आप एक बार जरूर देख सकते हैं.
Special Request:
दोस्तों, क्या आपको भी सुनसान रास्तों पर देर रात सफर करने से डर लगता है? ‘द ऑटॉप्सी ऑफ जेन डो’ के डायरेक्टर की यह नई हॉरर फिल्म देखने के लिए क्या आप तैयार हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.