Raakh Series Review in Hindi: अंदर से झकझोर कर रख देगी अली फजल और सोनाली बेंद्रे की वेब सीरीज ‘राख’

Raakh Series Review in Hindi: 1978 की दिल्ली रंगा-बिल्ला का वह खौफनाक हत्याकांड जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. अमेज़न प्राइम विडियो की नई वेब सीरीज ‘राख’ (Raakh) सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक ऐसी क्राइम-ड्रामा है, जो न केवल आपको डराती है बल्कि इंसान के भीतर छिपे उस अंधेरे को भी दिखाती है, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं.

Raakh Series Storyline in Hindi: राख सीरीज की कहानी

कहानी लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक अरोड़ा यानि आमिर बशीर और उनकी पत्नी मोना यानि सोनाली बेंद्रे की है. उनके दो बच्चे, सुमन और साहिल, एक दिन रेडियो स्टेशन जाने के लिए निकलते हैं लेकिन कभी वापस नहीं लौटते. अगले दिन, जंगल में उनकी लाशें मिलती हैं. केस की जिम्मेदारी एसआई जयप्रकाश जादव यानि कि अली फजल को मिलती है.

अब ये केस कैसे सुलझता है या फिर और उलझता है, जानने के लिए आपको ये पूरी सीरीज देखनी होगी. इस सीरीज में कुल 8 एपिसोड हैं और हर एपिसोड औसतन 40 मिनट का है.

Raakh Web Series Watch Full Trailer

Raakh Series Review in Hindi

राख सीरीज के प्लस पॉइंट्स

स्टार कास्ट की परफॉरमेंस: अली फजल ने ‘मिर्जापुर’ की भड़काने वाली इमेज से दूर एक बेहद शांत, संयमित लेकिन मजबूत किरदार निभाया है. सोनाली बेंद्रे ने एक ऐसी मां का दर्द बहुत गहराई से पेश किया है जो अपनी दुनिया के उजड़ जाने पर भी सच को स्वीकार नहीं कर पा रही है.

विलेन का खतरनाक किरदार: ‘राख’ का असली सितारा आकाश मखीजा और रमनदीप यादव हैं. इन्होंने कातिलों की मानसिकता को जिस स्तर पर जाकर निभाया है, वह वाकई अवॉर्ड-डिजर्विंग है. बाबू के किरदार में आकाश के कुछ सीन्स (खासकर अपनी मां के साथ) आपको अंदर तक झकझोर देंगे.

डायरेक्शन: प्रोसित रॉय ने एक बहुत ही ‘एटमॉस्फेरिक’ थ्रिलर बनाई है. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और 1978 के दौर को रिक्रिएट करने की बारीकी इसे एक ‘प्रीमियम’ एहसास देती है, जिसमे कमी निकलना बेहद ही मुश्किल है.

तकनीकी पक्ष: सौम्यनंदा साही की सिनेमैटोग्राफी और अजय जयंती का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को एक अलग लेवल पर ले जाता है. 1978 का दिल्ली और मुंबई का लुक तैयार करने में प्रोडक्शन डिजाइन का काम काबिले तारीफ है.

 

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राख सीरीज के नेगेटिव पॉइंट्स

स्लो स्पीड: सीरीज कहीं-कहीं बहुत धीमी हो जाती है. जयप्रकाश के अतीत (खासकर भीमराव अंबेडकर वाला सीन) को काफी लंबा खींचा गया है, जो मेन स्टोरी की स्पीड को सीधा प्रभावित करता है.

क्लाइमेक्स का भ्रम: सातवें एपिसोड के अंत में ऐसा लगता है कि शो खत्म हो गया है, लेकिन मेकर्स ने एक और फ्लैशबैक जोड़ दिया है. यह हिस्सा काफी परेशान करने वाला है और हो सकता है कि कई दर्शकों को यह पसंद ना आये.

निष्कर्ष

‘राख’ उन लोगों के लिए है जो एक ‘सीरियस और डिस्टर्बिंग’ क्राइम-थ्रिलर देखना पसंद करते हैं. यह कोई ऐसी सीरीज नहीं है जिसे आप खाना खाते समय देखें; यह आपको सोचने पर मजबूर करती है. भले ही इसकी पेस थोड़ी धीमी है, लेकिन अली फजल और विलेन बने दोनों कलाकारों की एक्टिंग इसे देखने लायक बनाती है.

Special Request:

दोस्तों, क्या आपने अमेज़न प्राइम विडियो की नई सीरीज ‘राख’ देखी? कातिलों की भूमिका निभाने वाले अभिनेताओं का अभिनय आपको कैसा लगा – क्या वे वाकई में आपको डराने में कामयाब रहे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.

Founder & Author : My name is Deepak Giri & I am from New Delhi, India. Filmi FryDay is your one stop shop for everything Entertainment.

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