Jana Nayagan Movie Review in Hindi: थलापति विजय का आखिरी धमाका, जानिए कैसी है फिल्म जन नेता?

Jana Nayagan Movie Review in Hindi: थलापति विजय के करियर की आखिरी फिल्म Jana Nayagan (हिंदी में Jan Neta) आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. पिछले काफी समय से सिर्फ तमिल फैंस ही नहीं बल्कि पूरा इंडिया इस फिल्म का इंतजार कर रहा था. ऑडियंस के बीच क्रेज तो बहुत ज्यादा है लेकिन क्या वास्तव में फिल्म उतनी ही अच्छी है या नहीं? आइये डिटेल में बात करते हैं.

Jana Nayagan Movie Plot in Hindi: जन नायगन फिल्म की कहानी

फिल्म की शुरुआत होती है साल 2013 से जहां थलापति (विजय) मदुरै सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है. जेल में उसे कई बार मारने की कोशिश की जाती है, लेकिन हर बार वह बच निकलता है. इसी दौरान जेलर श्रीकांत यानि कि गौतम वासुदेव मेनन को थलापति के अतीत पर शक होता है. इसी वजह से वो उसके पास्ट के बारे में जानना शुरू कर देता है.

लेकिन कुछ समय बाद ही श्रीकांत की मौत हो जाती है. तभी थलापति उसकी बेटी विजी यानि कि ममिता बैजू की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेता है. दूसरी तरफ अफ्रीकी देश से फरार हुआ खूंखार क्रिमिनल जॉन हिमलर यानि कि बॉबी देओल भारत पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. रोजा रंगास्वामी यानि कि प्रकाश राज एक भ्रष्ट नेता है जोकि हिमलर का साथ देता है.

अब थलापति के पास 2 मिशन हैं. एक तो उसे गोद ली हुई बेटी की रक्षा करनी है और साथ में देश को भी बचाना है. वो ये सब कैसे करता है? यही सब आपको फिल्म में देखने को मिलेगा.

Jana Nayagan Release Date Locked

Jana Nayagan Movie Review in Hindi

जन नायगन फिल्म के प्लस पॉइंट्स

अगर आप थलापति विजय के कट्टर वाले फैन हैं, तो फिल्म आपको शुरू से लेकर एंड तक खूब मनोरंजन देने वाली है. विजय की एंट्री, उनके डायलॉग्स, एक्शन और उनका सिग्नेचर स्टाइल हर बार थिएटर में तालियां बटोरता है.

फिल्म में पिता और बेटी के रिश्ते को काफी इमोशनल तरीके से और भी बेहतर दिखाया गया है. विजय और ममिता बैजू के इमोशनल सीन कहानी को और भी मजबूत बनाते हैं. इसके अलावा फिल्म की लेंथ भले ही करीब 3 घंटे की है लेकिन इसकी स्पीड भी उतनी ही तेज है जिससे की दर्शक बोरियत महसूस ना करें.

जैसा कि विजय की फिल्मों में अक्सर देखा जाता है इस बार भी फिल्म में राजनीति, भ्रष्टाचार, देशभक्ति और महिलाओं की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दे उठाये गए हैं. थलापति विजय फिल्म के हीरो हैं और वो पूरी फिल्म की जान हैं. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार है कि कई कमजोर सीन्स का भी पता नहीं चलता.

प्रकाश राज अपने पुराने अंदाज में शानदार नजर आये हैं. वहीं गौतम वासुदेव मेनन, प्रियामणि, रेवती और सुनील ने भी अपने-अपने किरदारों में बेहतर काम किया है.

अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहा है और यह फिल्म का प्लस पॉइंट भी है, जो किसी भी सीन को बेहतर बनाने का काम करता है.

 

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कहाँ रह गई कमी?

बॉबी देओल खतरनाक विलेन के रूप में दमदार जरूर लगे हैं लेकिन कमजोर राइटिंग के चलते उनका किरदार विजय के सामने थोड़ा कमजोर नजर आया है. इतना ही नहीं विलेन की बेकस्टोरी भी कुछ खास नहीं है. नार्थ इंडिया के फैंस इस बात से नाराज हो सकते हैं.

इसके अलावा फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी कहानी है. फिल्म देखते हुए आपको कई बार ऐसा एहसास होगा कि ऐसा कुछ हम पहले भी देख चुके हैं. यानि कि कहानी में नयापन कुछ भी नहीं है.

फिल्म में सिनेमैटोग्राफी अच्छी नजर आती है, लेकिन VFX कई जगह कमजोर लगते हैं. खासकर रोबोट वाले सीक्वेंस बड़े बजट की फिल्म के हिसाब से उतना अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ते.

इसके अलावा फिल्म में कुछ डायलॉग और रेफरेंस इस तरह से दिखाए गए हैं जिन्हें हिंदी ऑडियंस सही से समझ ने ही पायेगी जबकि वो तमिल ऑडियंस के लिए सही हो सकते हैं. फिल्म की डबिंग ठीक ठाक है.

 

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निष्कर्ष

विजय की फिल्म जन नायगन (Jan Neta) की कहानी नई तो नहीं है लेकिन ऑडियंस के लिए एक ऐसी मास एंटरटेनर है जो पूरी तरह थलापति विजय की स्टार पावर पर ही टिकी हुई है. अब क्योंकि ये विजय के करियर की आखिरी फिल्म है तो ज्यादा से ज्यादा ऑडियंस थियेटरों में जा सकती है और इसी का फायदा मेकर्स को मिलने वाला है.

वहीँ दूसरी ओर अगर आप विजय के कट्टर फैन नहीं हैं और फिल्म में कुछ नयापन देखने जा रहे हैं तो आपको ये एवरेज लग सकती है और आप थोड़ा निराश हो सकते हैं.

आपकी राय?

अगर आप विजय की फिल्म जन नायगन (जन नेता) देख चुके हैं तो बताइए आप इसे 5 में से कितने स्टार देंगे? क्या आपको लगता है कि Jan Neta थलापति विजय के फिल्मी सफर को एक यादगार विदाई देती है? अपनी राय कमेंट में जरूर दें.

Founder & Author : My name is Deepak Giri & I am from New Delhi, India. Filmi FryDay is your one stop shop for everything Entertainment.

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