Governor Movie Review in Hindi: 1990 का भारत. देश की तिजोरी खाली होने की कगार पर है, विदेशी मुद्रा भंडार केवल 1 बिलियन डॉलर बचा है और एक महीने के अंदर आर्थिक संकट का खतरा मंडरा रहा है. इसी उथल-पुथल के बीच एक आईएएस ऑफिसर की एंट्री होती है, जो न केवल आरबीआई (RBI) का गवर्नर बनता है, बल्कि देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को बचाने का बीड़ा भी उठाता है.
मनोज बाजपेयी स्टारर फिल्म ‘गवर्नर’ (Governor) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. यह फिल्म आर्थिक संकट जैसे जटिल सब्जेक्ट को बेहद सरलता और सादगी से समझाने का एक अच्छा प्रयास है.
Governor Movie Storyline in Hindi: गवर्नर फिल्म की कहानी
फिल्म 1990 के उस दौर को दिखाती है जब भारत आर्थिक तंगी से जूझ रहा था. केंद्र सरकार की सलाह पर ए. रामनन यानि मनोज बाजपेयी को आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किया जाता है. रामनन का बैकग्राउंड इकोनॉमिक्स का नहीं है, इसलिए आरबीआई के बाकी ऑफिसर उन पर सवाल उठाते हैं. दूसरी ओर, केंद्र में अल्पसंख्यक सरकार है, जिसके कारण प्रधानमंत्री शेखर यानि संजय सोनू के लिए कड़े आर्थिक फैसले लेना मुश्किल है. रामनन इन चुनौतियों के बीच कैसे देश को आर्थिक तबाही से बचाते हैं, यही सब आपको फिल्म में देखने को मिलेगा.
Governor Movie Watch Full Trailer
Raakh Series Review in Hindi: अंदर से झकझोर कर रख देगी अली फजल और सोनाली बेंद्रे की वेब सीरीज ‘राख’
Governor Movie Review in Hindi
गवर्नर फिल्म के प्लस पॉइंट्स
मनोज बाजपेयी का दमदार अभिनय: एक ऐसा किरदार जो स्वभाव से दब्बू और मृदुभाषी है, लेकिन फैसला लेते समय बेहद निर्णायक और लीडर की तरह सामने आता है. मनोज बाजपेयी ने इसे पूरी सहजता से निभाया है.
सिंपल कहानी कहने का निराला अंदाज: फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसकी सरलता है. इकोनॉमिक्स की जटिलताओं को एक ‘बंदर’ (Monkey) के उदाहरण से समझाना काफी स्मार्ट मूव है. फिल्म में ह्यूमर का तड़का भी है. जैसे वो सीन जहाँ आरबीआई की ट्रक एक स्कूटर वाले को टक्कर मारती है, जो दर्शकों को खूब पसंद आएगा.
सपोर्टिंग कास्ट: नौशाद मोहम्मद कुंजु फिल्म के ‘दूसरे हीरो’ की तरह हैं और उन्होंने जबरदस्त काम किया है. अदा शर्मा (अदिति वर्मा) का काम सेकंड हाफ में चमक बिखेरता है, जबकि मधु शाह का अभिनय भी दिल छू लेने वाला है. जयवंत वाडकर (पियन) का एक सीन सेकंड हाफ में दर्शकों की आंखों में आंसू ले आएगा.
View this post on Instagram
गवर्नर फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
सब्जेक्ट का सूखापन: मेकर्स की लाख कोशिशों के बावजूद, आर्थिक संकट का विषय एक बड़े वर्ग को ‘सूखा’ लग सकता है. बहुत से दर्शक इसे थिएटर्स जाने के बजाय इसके ओटीटी पर आने का इंतजार करेंगे.
कमजोर मिडिल पोर्शन: फिल्म के फर्स्ट और सेकंड हाफ के बीच में कहानी थोड़ी ढीली पड़ जाती है. यूएस जाने की इच्छा रखने वाले एक कर्मचारी का सब-प्लॉट पूरी तरह से थोपा हुआ लगता है, जिसे आसानी से हटाया जा सकता था.
तकनीकी खामियां: फिल्म का वीएफएक्स (VFX) कई जगह काफी कमजोर लगता है. साथ ही, फिल्म के गाने भी बिल्कुल प्रभाव नहीं छोड़ते, बल्कि वे सिर्फ कहानी की रफ्तार को स्लो करते हैं.
निष्कर्ष
‘गवर्नर’ एक चुनौतीपूर्ण विषय को सादगी से पेश करने वाली फिल्म है, जो पूरी तरह से मनोज बाजपेयी के कंधों पर टिकी है. अगर आप गंभीर सिनेमा और इकोनॉमिक ड्रामा के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी. हालांकि, सीमित बज और विषय की गंभीरता के कारण बॉक्स ऑफिस पर इसके कामयाब होने के चांस काफी कम नजर आ रहे हैं.
Special Request:
दोस्तों, क्या आपने ‘गवर्नर’ फिल्म देखी? मनोज बाजपेयी की यह जटिल आर्थिक कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपको लगता है कि इस तरह के विषयों पर आधारित फिल्में थिएटर्स में चलनी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.