KD The Devil Movie Review in Hindi: कन्नड़ सिनेमा में ‘KGF’ के बाद बड़े पैमाने पर पीरियड एक्शन फिल्में बनाने की जो होड़ लगी है, उसी कड़ी में डायरेक्टर प्रेम की ‘KD: द डेविल’ (KD: The Devil) आज रिलीज हो गई है. ध्रुव सरजा, संजय दत्त और शिल्पा शेट्टी जैसे कई बड़े सितारों से सजी यह फिल्म अपनी भव्यता और ‘लार्जर दैन लाइफ’ विजन के लिए चर्चा में जरूर थी और कई बार डिले भी हुई. लेकिन क्या फिल्म वाकई उतनी ही अच्छी है या नहीं? आइये डिटेल में बात करते हैं.
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KD The Devil Movie Storyline in Hindi: केडी द डेविल फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी काली दास यानि कि ध्रुव सरजा की है, जो एक अनपढ़ है लेकिन दिल का साफ है. उसका भाई धर्म यानि कि रमेश अरविंद एक अनुशासित टीचर है, जिसके काली से बिलकुल भी विचार नहीं मिलते हैं. काली बचपन से ही अंडरवर्ल्ड डॉन धाक देवा यानि कि संजय दत्त को अपना आदर्श मानता है.
काली को ‘मच्चू लक्ष्मी’ यानि कि रेशमा नय्या से प्यार हो जाता है, लेकिन हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि काली को उसी दुनिया में उतरना पड़ता है जहाँ उसका सामना अपने ही आदर्श ‘देवा’ से होता है. कहानी में सत्यवती यानि कि शिल्पा शेट्टी और अन्नायप्पा यानि कि रविचंद्रन जैसे किरदार भी एंट्री लेते हैं जोकि उसके इस संघर्ष को और भी पेचीदा बना देते हैं. आगे फिल्म में क्या होता है? जानने के लिए आपको ये पूरी फिल्म देखने पड़ेगी.
KD The Devil Movie Review in Hindi
केडी द डेविल फिल्म के प्लस पॉइंट्स
शानदार विजुअल्स: डायरेक्टर प्रेम के पास विजुअल्स की जबरदस्त समझ है. फिल्म के सेट्स, फ्रेमिंग और कलर का इस्तेमाल शानदार है. सिनेमैटोग्राफी पूरी फिल्म के दौरान जबरदस्त बनी रहती है.
संजय दत्त का धमाका: संजय दत्त ने एक बार फिर विलेन के तौर पर अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित किया है. एक्शन सीन्स में उनका ‘स्वैग’ देखते ही बनता है.
सपोर्टिंग कास्ट: रमेश अरविंद, रविचंद्रन और शिल्पा शेट्टी ने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है और कहानी में जरूरी चीजों को दर्शकों के सामने लाने की पूरी कोशिश की है.
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केडी द डेविल फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
ओवर स्क्रीनप्ले: फिल्म का सबसे कमजोर कड़ी इसकी एडिटिंग और स्टोरीलाइन है. सीन अचानक एक टाइमलाइन से दूसरी टाइमलाइन पर जंप करते हैं, जिसे समझना प्रत्येक के लिए आसान नहीं है.
लाउड परफॉरमेंस: ध्रुव सरजा ने काफी मेहनत की है, लेकिन उनकी एक्टिंग कई जगह जरूरत से ज्यादा आक्रामक लगी है साथ ही कई जगह आपको बहुत ज्यादा ‘लाउड’ महसूस होता है. रेशमा नय्या ने भी कोशिश की है, लेकिन कभी-कभी उनके किरदार का भरपूर फायदा नहीं उठाया गया.
निरंतरता की कमी: फिल्म में कॉस्ट्यूम्स और सीन्स के बीच निरंतरता की भारी कमी है. ‘शिवा शिवा’ जैसे गाने कहानी के बीच में बिना किसी मतलब के डाले गए हैं. इन सब के अलावा विवादों के कारण नोरा फतेही का हिस्सा पूरी तरह हटा दिया गया है. इसी वजह से एडिटिंग काफी उबड़-खाबड़ सी लगती है.
छोटा कैमियो: किच्छा सुदीप का कैमियो इतना छोटा है कि जब तक ऑडियंस उसे पूरी तरह एन्जॉय कर पाती वो ख़त्म हो जाता है.
निष्कर्ष
‘KD: द डेविल’ एक ऐसी फिल्म है जो स्केल में तो बहुत बड़ी है, लेकिन स्टोरीलाइन और निरंतरता के मामले में थोड़ी लड़खड़ा जाती है. अगर आप ‘मसाला’ एक्शन और ध्रुव सरजा के ‘लाउड’ अंदाज को पसंद करते हैं तो ये फिल्म आपको मनोरंजन दे सकती है. फिलहाल, यह केवल ध्रुव सरजा के कट्टर फैंस और बड़े पर्दे पर एक्शन पसंद करने वालों के लिए एक औसत फिल्म है.
Special Request:
दोस्तों, अगर आपने ध्रुव सरजा की फिल्म ‘केडी द डेविल’ (KD The Devil) देख ली है तो बताइये आपको ये फिल्म कैसी लगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.