Heer Sara Movie Review in Hindi: मानवी और पत्रलेखा की शानदार केमिस्ट्री लेकिन स्क्रिप्ट ने कर दिया काम खराब

Heer Sara Movie Review in Hindi: सिनेमा में सबसे दुखद तब होता है जब एक फिल्म के पास अच्छी कहानी और बेहतरीन कलाकार तो हों, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट के चलते उसे ऑडियंस नहीं मिल पाती. ‘हीर सारा’ (Heer Sara), जिसमें पत्रलेखा और मानवी गगरू मुख्य भूमिका में हैं, एक ऐसी ही फिल्म है जो अपनी संभावनाओं के बोझ तले दब गई है.

Heer Sara Movie Storyline in Hindi: हीर सारा फिल्म की कहानी

फिल्म में अलग-अलग दुनिया की 2 लड़कियों की कहानी दिखाई गई है.

हीर (मानवी गगरू): जो अपने शरीर के वजन को लेकर जूझ रही है और जिसका बॉयफ्रेंड उसे बिना ब्रेकअप के छोड़ देता है.

सारा (पत्रलेखा): जो एक बाइकर है, बिजनेसमैन बनना चाहती है और अपनी मां को ढूंढना चाहती है जो 10 साल पहले घर छोड़कर चली गई थी.

दोनों घर से भागती हैं और पुडुचेरी के सफर पर एक-दूसरे से टकराती हैं. लेकिन यह फिल्म असल में किस बारे में है? यह सफर के बारे में है या मंजिल के बारे में? फिल्म के एंड तक यह साफ ही नहीं हो पाता.

Heer Sara Movie Watch Full Trailer

Heer Sara Movie Review in Hindi

हीर सारा फिल्म के प्लस पॉइंट्स

मानवी और पत्रलेखा की जोड़ी: फिल्म की असली ताकत मानवी और पत्रलेखा के बीच की ऑर्गेनिक केमिस्ट्री है. मानवी गगरू ने एक बार फिर साबित किया कि वह अपनी ‘शार्प’ टाइमिंग से किसी भी फिल्म को कंधे पर उठा सकती हैं.

बहन जैसी दोस्ती: फिल्म में दोस्ती के कुछ पल इतने वास्तविक हैं कि वे सीधे दिल को छू जाते हैं.

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हीर सारा फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स

दिशाहीन स्क्रिप्ट: फिल्म मात्र 1.30 घंटे की है, फिर भी इसका सेकंड हाफ इतना धीमा है कि आप उबने लगेंगे. कहानी का फोकस बार-बार बदलता रहता है और अंत तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचता.

सपोर्टिंग किरदारों की कमी: मुख्य किरदारों को छोड़कर बाकी सभी सपोर्टिंग किरदार सिर्फ नाम मात्र के लिए हैं. उनमें न गहराई है और न ही कोई मकसद.

मुद्दों से भटकना: फिल्म ‘क्वीर रिलेशनशिप्स’ और पारिवारिक ड्रामा जैसे गंभीर मुद्दों को छूती तो है, लेकिन उनके साथ न्याय करने के बजाय उनसे दूर भागती है. फिल्म सिर्फ दर्द दिखाती है, लेकिन उसे ‘हीलिंग’ या समाधान की तरफ ले जाने में नाकाम रहती है.

जब वी मेट का साया: मानवी गगरू के कुछ सीन्स आपको सीधे ‘जब वी मेट’ की ‘गीत’ की याद दिलाएंगे, जो फिल्म को अपना खुद का व्यक्तित्व देने में रुकावट पैदा करता है.

निष्कर्ष

‘हीर सारा’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें ‘दिल’ तो है, लेकिन ‘रूह’ गायब है. यह उन फिल्मों में से है जिसे देखकर आप यही सोचेंगे कि “यह बहुत बेहतर हो सकती थी”. पत्रलेखा और मानवी गगरू ने अपना बेस्ट दिया है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट के चलते वो भी किसी काम का नहीं है.

Special Request:

दोस्तों, क्या आपने ‘हीर सारा’ देखी? क्या आपको भी लगता है कि मानवी और पात्रालेखा की शानदार एक्टिंग के बावजूद फिल्म की कमजोर पटकथा ने इसे एक बेहतर फिल्म बनने से रोक दिया? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.

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