Haunted 3D – Echoes of The Past Review in Hindi: विक्रम भट्ट की ‘हॉन्टेड’ (2011) सीरीज ने कभी बॉलीवुड में हॉरर और 3D तकनीक का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था. लेकिन, उनकी नई पेशकश ‘हॉन्टेड – इकोस ऑफ द पास्ट’ (Haunted – Echoes Of The Past) उस विरासत को आगे बढ़ाने के बजाय, तकनीक के गलत इस्तेमाल और कमजोर कहानी के जाल में फंस कर रह गई है.
Haunted 3D – Echoes of The Past Storyline in Hindi: हॉन्टेड 3डी – इकोस ऑफ द पास्ट फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी फिल्ममेकर देव यानि मिमोह चक्रवर्ती के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी निजी जिंदगी में मिले धोखे के बाद मुंबई छोड़कर माणिकताल के एक रहस्यमयी महल में रहने आता है. महल का केयरटेकर दावा करता है कि उसका एक हिस्सा दशकों से बंद है, लेकिन देव को वहाँ एक आत्मा और सुनहरी यानि चेतना पांडे नाम की लड़की मिलती है, जो बीते हुए कल से जुड़ी है.
देव का सामना जब उस दुष्ट आत्मा से होता है, तब उसे एहसास होता है कि वह लड़की सदियों पुरानी एक अनसुलझी घटना का हिस्सा है. अब देव का मकसद उस आत्मा से लड़कर सुनहरी और उस महल के गहरे राज़ को सुलझाना है. वो ये सब कैसे करता है इसके लिए आपको थियेटर जाना होगा.
Haunted 3D – Echoes of The Past Watch Full Trailer
Haunted 3D – Echoes of The Past Review in Hindi
Haunted 3D – Echoes of The Past Plus Points
विक्रम भट्ट फ़ॉर्मूला: विक्रम भट्ट ने अपनी शैली के अनुसार हॉरर को बिल्डअप करने में समय लिया है. फिल्म का ‘ओल्ड-स्कूल’ डरावना माहौल कई जगह असरदार नजर आता है.
चेतना पांडे और प्रणीत भट्ट: चेतना पांडे ने अपनी भूमिका में जान डाली है और वह पर्दे पर काफी प्रभावशाली लगी हैं. फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज प्रणीत भट्ट हैं, जिन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है.
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Haunted 3D – Echoes of The Past Negative Points
तकनीक का ख़राब इस्तेमाल: फिल्म के लिए सबसे बड़ा नेगेटिव पॉइंट इसका एआई (AI) और वीएफएक्स (VFX) है. इतना ज्यादा एआई का इस्तेमाल किया गया है कि फिल्म किसी भी जगह से ‘असली’ नहीं लगती. एक सीन में तो एआई सॉफ्टवेयर का लोगो तक स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है, जो बहुत ही नॉन-प्रोफेशनल लगता है. फिल्म का 3D अनुभव भी औसत दर्जे है.
मिमोह चक्रवर्ती की एक्टिंग: मिमोह चक्रवर्ती ने अपने करियर में कई फ़िल्में की हैं लेकिन अपने रोल को दर्शकों के सामने कैसे पेश करना है उन्हें इस बारे में अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है. फिल्म उनकी एक्टिंग काफी अजीब लगी है. डिप्रेस्ड फिल्ममेकर के रोल में वह जरूरत से ज्यादा ओवरएक्टिंग करते नजर हैं.
कमजोर क्लाइमेक्स: ऐसी फिल्मों में क्लिमैक्स का काफी महत्त्व होता है अंत तक दर्शक एक बेहतरीन एंडिंग देखना पसंद करते हैं. लेकिन इस फिल्म के केस में ऐसा नहीं है. क्योंकि फिल्म कहानी का अंत बहुत ही जल्दबाजी में कर दिया गया है. ‘हॉन्टेड’ के फर्स्ट पार्ट की तरह यहां कोई संघर्ष और ज्यादा डरावनापन देखने को नहीं मिला.
निष्कर्ष
‘हॉन्टेड – इकोस ऑफ द पास्ट’ के पास एक अच्छी कहानी तो है लेकिन तकनीकी खामियों और कमजोर लेखन ने इसका सारा मजा किरकिरा कर दिया. यदि आप सिर्फ ‘हॉन्टेड’ फ्रेंचाइजी के नाम पर यह फिल्म देखने की सोच रहे हैं, तो शायद आपको निराशा ही हाथ लगेगी. विक्रम भट्ट को इसका एहसास जल्दी ही हो जायेगा कि उन्होंने फिल्म में AI का ऐसा इस्तमाल क्यों किया?
Special Request:
दोस्तों, क्या आपने ‘हॉन्टेड – इकोस ऑफ द पास्ट’ देखी? क्या आपको भी फिल्म के वीएफएक्स और एआई का इस्तेमाल फिल्म की कहानी को बिगाड़ने वाला लगा? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.