Masters of the Universe Movie Review in Hindi: हॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर ट्रैविस नाइट ने दशकों से फैंस के दिलों में बसे ‘ही-मैन’ को बड़े पर्दे पर फिर जीवित करने की कोशिश की है. निकोलस गैलिट्जाइन और जेरेड लेटो स्टारर ‘ही-मैन एंड द मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स’ (He-Man and the Masters of the Universe) अब रिलीज हो चुकी है. क्या यह फिल्म उस नॉस्टैल्जिया को पूरी तरह से न्याय दे पाई या सिर्फ एक भव्य दिखने वाली औसत फैंटेसी बनकर रह गई? आइये बात करते हैं.
Masters of the Universe Movie Storyline in Hindi: मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स फिल्म की कहानी
कहानी प्रिंस एडम यानि कि निकोलस गैलिट्जाइन की है, जो अपने गृह ‘इटर्निया’ से सालों से दूर है. उसे अपनी जादुई ‘स्वॉर्ड ऑफ पावर’ मिलती है और उसे अपने भूले-बिसरे भाग्य का अहसास होता है. इटर्निया लौटने पर उसे पता चलता है कि उसका राज्य दुष्ट ‘स्केलेटर’ यानि जेरेड लेटो के अधीन है. एडम अपने असली स्वरूप ‘ही-मैन’ में आता है और टीला यानि कि कैमिला मेंडेस, मैन-एट-आर्म्स यानि इड्रिस एल्बा और अपने वफादार योद्धाओं के साथ स्केलेटर के खिलाफ युद्ध लड़ता है. आगे क्या होता है यही फिल्म का मेन हिस्सा है.
Masters of the Universe Movie Watch Full Trailer
He-Man and the Masters of the Universe Movie Review in Hindi
मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स फिल्म के प्लस पॉइंट्स
निकोलस गैलिट्जाइन का दमदार अभिनय: फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी निकोलस गैलिट्जाइन हैं. उन्होंने प्रिंस एडम के किरदार में एक ऐसी मासूमियत और गंभीरता दिखाई है, जो ऑडियंस को उनसे जोड़े रखती है. जब भी फिल्म की कहानी थोड़ी लड़खड़ाती नजर आती है, तब भी निकोलस अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से ध्यान भटकने नहीं देते.
विजुअल स्केल और प्रोडक्शन डिजाइन: इटर्निया की दुनिया को जिस भव्यता के साथ बड़े पर्दे पर उतारा गया है, वह वाकई देखने लायक है. पुराने कार्टून के आइकोनिक लोकेशन्स, आजिबो-गरीब जीव और कैरेक्टर डिजाइन देखकर पुराने फैंस खुश हो जायेंगे.
दमदार बैकग्राउंड स्कोर: डेनियल पेंबर्टन का म्यूजिक फिल्म में वह ‘लार्जर-देन-लाइफ’ वाली एनर्जी भरता है, जो इस तरह की फिल्मों के लिए जरूरी होता है. कई बार फिल्म के हलके-फुल्के सीन्स को यह म्यूजिक ही संभाल लेता है.
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मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
डायलॉग्स की भरमार: फिल्म की कहानी को समझाने के बजाय इसमें डायलॉग्स की भरमार ज्यादा नजर आई है. फिल्म में आपको कई जगह ऐसे लंबे-लंबे डायलॉग्स सुनने को मिलेंगे जो किसी को भी बोरिंग लग सकते हैं.
इमोशन की कमी: फिल्म में एडम के संघर्ष के इमोशनल कोर को छुआ तो गया है, लेकिन राइटिंग के तौर पर कहानी दर्शकों के दिलों को नहीं छू पाई है. उनकी कहानी और संघर्ष के सीन्स और भी बेहतर हो सकते थे.
कंफ्यूज विलेन: स्केलेटर का किरदार कन्फ्यूज लगा है. जेरेड लेटो ने किरदार में पूरी तरह डूबने की कोशिश जरूर की है, लेकिन यह कभी डरावना तो कभी अनजाने में मजाकिया लगता है जो की कहानी के हिसाब से सही नहीं है. फिल्म को एक ऐसे विलेन की जरूरत थी जो सच में खतरनाक लगे, लेकिन यहाँ पर मेकर्स ने निराश किया है.
आर्टिफीसियल सीन्स: फिल्म के एक्शन सीक्वेंस भव्य जरूर हैं, लेकिन इनमें वह मौलिकता नहीं है जो एक बड़े पैमाने की फैंटेसी फिल्म में होनी चाहिए. वीएफएक्स (VFX) कई जगह अच्छे हैं लेकिन कई जगह ये Artificial महसूस होते हैं.
निष्कर्ष
‘ही-मैन एंड द मास्टर्स ऑफ द यूनिवर्स’ एक ऐसी फिल्म है जिसमे तलवार है, मसल्स हैं और नॉस्टैल्जिया भी है, पर जो कमी है, वो है एक ऐसी कहानी की जो इटर्निया की दुनिया को सच में जीत सके. अगर आप केवल विजुअल स्पेक्टेकल के लिए जाना चाहते हैं, तो यह ठीक है, पर किसी बड़ी उम्मीद के साथ न जाएं.
Special Request:
दोस्तों, क्या आपने बचपन में ही-मैन देखा था? क्या यह नई फिल्म आपके उस नॉस्टैल्जिया पर खरी उतरी, या आपको भी लगा कि इसमें ग्रेस्कल वाली असली ताकत की कमी थी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.