Karuppu Movie Review in Hindi: तमिल सुपरस्टार सूर्या के फैंस का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ! आर्थिक के साथ-साथ कई बाधाओं के बाद, ‘करुप्पू’ (Karuppu) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. डायरेक्टर आरजे बालाजी ने इस बार एक ऐसा दांव खेला है जिसमें उन्होंने भक्ति, न्याय और ‘मास’ मनोरंजन का एक जबरदस्त कॉकटेल तैयार किया है.
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Karuppu Movie Storyline in Hindi: करुप्पू फिल्म की कहानी
चेन्नई में हुई एक डकैती से शुरू हुई यह कहानी जल्द ही न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को उजागर करती है. जब सिस्टम पूरी तरह से बिक जाता है और गरीबों को न्याय नहीं मिलता, तब कुलदेवता ‘करुप्पुसामी’ खुद इंसानी रूप (सरवनन) धारण कर धरती पर उतरते हैं. सूर्या को फिल्म में इसी ‘सरवनन’ के किरदार में देखा गया है, जो कानून के दायरे में रहकर अन्याय के खिलाड़ लड़ते हैं और उसका विनाश करते हैं.
Karuppu Movie Review in Hindi
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करुप्पू फिल्म के प्लस पॉइंट्स
सूर्या का औरा: यह फिल्म पूरी तरह से सूर्या की है. उनके ‘करुप्पुसामी’ वाले हिस्से और सरवनन के रूप में उनका ‘स्वैग’ हर फ्रेम में हावी रहता है. उनकी आँखें और डायलॉग डिलीवरी आपको ‘गजनी’ और ‘सिंघम’ वाले दिनों की याद दिला देगी.
डायरेक्टर आरजे बालाजी का सरप्राइज: डायरेक्टर के तौर पर बालाजी ने कमर्शियल बीट्स को बहुत अच्छे से पकड़ा है. लेकिन सबसे बड़ा सरप्राइज उनकी एक्टिंग है. एक चालाक और क्रूर विलेन के रूप में उन्होंने शानदार काम किया है.
साई अभ्यंकर का म्यूजिक: फिल्म की जान इसका बैकग्राउंड स्कोर (BGM) है. ‘गॉड मोड’ (God Mode) और ‘वेरप्पा’ (Verappa) जैसे ट्रैक्स थिएटर में रोंगटे खड़े कर देते हैं. आपको जरूर पसंद आएंगे.
सपोर्टिंग कास्ट: तृषा कृष्णन ने एक ईमानदार वकील के रूप में अपनी भूमिका को गरिमा के साथ निभाया है. दिग्गज अभिनेता इंद्रन्स और अनघा माया रवि ने भी अपनी-अपनी जगह बेहतर काम किया है.
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करुप्पू फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
स्लो शुरुआत: फिल्म को अपनी लय पकड़ने में थोड़ा सा समय लगता है. सूर्या की एंट्री फिल्म के लगभग आधे घंटे बाद होती है. इसलिए आपको थोड़ा धैर्य रखना होगा.
कमजोर VFX: कुछ सुपरनैचुरल सीन्स में विजुअल इफेक्ट्स थोड़े कच्चे लगते हैं.
प्रेडिक्टिबिलिटी: फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ा प्रेडिक्टेबल साल लगने लगता, जहाँ कहानी की तुलना में ‘फैन सर्विस’ पर ज्यादा ध्यान दिया गया है.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर ‘करुप्पू’ एक ऐसी फिल्म है जिसे खास तौर पर थिएटर में सीटियाँ और तालियाँ बजाने के लिए बनाया गया है. यह सूर्या के उस ‘लार्जर दैन लाइफ’ अवतार को वापस लाती है जिसे देखने के लिए उनके फैंस काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे.
Special Request:
दोस्तों, क्या आपको लगता है कि सूर्या का यह ‘भगवान’ वाला अवतार उनकी पिछली एक्शन फिल्मों से बेहतर है? ट्रेलर डिकोड करने के बाद, क्या फिल्म आपकी उम्मीदों पर खरी उतरी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.