Mortal Kombat II Movie Review in Hindi: हॉलीवुड अब वीडियो गेम फिल्मों को गंभीरता से ले रहा है, और ‘मॉर्टल कॉम्बैट II’ (Mortal Kombat II) इसका सटीक उदाहरण है. जहाँ 2021 की पहली फिल्म ने केवल नींव रखी थी, वहीं यह सीक्वल इसे और भी आगे ले जाने के लिए तैयार है. ‘मॉर्टल कॉम्बैट II’ एक ऐसी फिल्म है जो अपनी कमियों के बावजूद आपका मनोरंजन करने में सफल रहती है. अगर आप गेम के फैन हैं, तो पर्दे पर अपने पसंदीदा किरदारों को खून-खराबा करते देखना आपके लिए एक ‘फन राइड’ हो सकता है.
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Mortal Kombat II Movie Storyline in Hindi: मॉर्टल कॉम्बैट II फिल्म की कहानी
फिल्म वहीं से शुरू होती है जहाँ पिछला पार्ट खत्म हुआ था. इस बार ध्यान ‘आउटवर्ल्ड’ और ‘अर्थरेल्म’ के बीच होने वाले उस महा-मुकाबले पर है जिसकी चर्चा सदियों से है. कहानी में जॉनी केज यानि कि कार्ल अर्बन की धाँसू एंट्री फिल्म में जान फूँकती है, जो अपनी पॉप-कल्चर रेफरेंस और जोक्स से माहौल को हल्का बनाए रखते हैं. बाकी फिल्म में एक्शन की भरमार है, आप देखेंगे तो पता चल ही जायेगा.
Mortal Kombat II Movie Review in Hindi
मॉर्टल कॉम्बैट II फिल्म के प्लस पॉइंट्स
कार्ल अर्बन का जादू: जॉनी केज के रूप में कार्ल अर्बन ने बेहतरीन काम किया है. हालांकि उनकी एक्टिंग में उनके ‘द बॉयज़’ वाले ‘बुचर’ (Butcher) किरदार की झलक देखने को जरूर मिलती है, फिर भी वह पर्दे पर सबसे दिलचस्प नजर आए हैं.
जबरदस्त एक्शन: डायरेक्टर साइमन मैक्कॉइड ने पिछली फिल्म की तुलना में इस बार एक्शन और फाइट सीन्स को ज्यादा भव्य और रोमांचक बनाया है. आपके लिए गेम के सिग्नेचर मूव्स को देखना काफी मजेदार रहेगा.
किटाना का डेब्यू: एडलाइन रुडोल्फ ने किटाना के रूप में काफी प्रभावित किया है. हालांकि रोमांस के लिए फिल्म में जगह कम थी, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म को एक नई ताजगी देती है.
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मॉर्टल कॉम्बैट II फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स
कमजोर स्क्रिप्ट: फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी कड़ी इसकी स्क्रिप्ट है. कहानी में कई जगह ‘होल’ हैं और सीन्स के बीच का जुड़ाव काफी फीका नजर आटा है. फिल्म का आधा समय अगले पार्ट की भूमिका बनाने में ही निकल जाता है, जिससे वर्तमान कहानी का वजन कम हो जाता है.
एडिटिंग में कमी: फिल्म की एडिटिंग काफी बिखरी हुई है. कहानी कभी बहुत तेज भागती है तो कभी अचानक थम जाती है. कई किरदारों की मौत को ऐसे दिखाया गया है जैसे फिल्म में उनका कोई महत्व ही न हो.
कमजोर VFX: कुछ जगहों पर विजुअल इफेक्ट्स (VFX) काफी कमजोर लगते हैं, जिससे इतनी बड़ी फ्रेंचाइजी की फिल्म कई बार चीप महसूस होने लगती है.
हीरोयुकी सनाडा का कम इस्तेमाल: स्कॉर्पियन जैसे महान किरदार को इस बार भी बहुत कम स्क्रीन टाइम दिया गया है, जो इस फ्रेंचाइजी के फैंस को निराश कर सकता है.
निष्कर्ष
‘मॉर्टल कॉम्बैट II’ में खामियां तो बहुत हैं, लेकिन अगर आप इसे बिना ज्यादा दिमाग लगाए केवल एक्शन और गेमिंग की वजह से देखते हैं, तो यह आपको जरूर पसंद आएगी. बाकी फिल्म की कहानी पर और ध्यान दिया होता तो ये एक परफेक्ट एक्शन फिल्म हो सकती थी.
Special Request:
दोस्तों, जॉनी केज और स्कॉर्पियन में से आपका पसंदीदा फाइटर कौन है? क्या आपको लगता है कि हॉलीवुड अब वीडियो गेम पर आधारित सही फिल्में बना पा रहा है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.