Adarsh Baal Vidyalaya Review in Hindi: अगर आपको सच में सरकारी स्कूलों की स्थिति देखनी है तो आपको ‘आदर्श बाल विद्यालय’ जरूर देखनी चाहिए. इसमें आपको सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षा व्यवस्था की कमियों और सिस्टम की पॉलिटिक्स जैसे कई पहलू देखने को मिलेंगे. लेकिन क्या ये दर्शकों की सभी उम्मीदों पर खरी उतरती है? आइये डिटेल में बात करते हैं.
Adarsh Baal Vidyalaya Plot in Hindi: आदर्श बाल विद्यालय सीरीज की कहानी
सीरीज की कहानी के बारे में बात करें तो इसकी कहानी दिल्ली के बाहरी इलाके टिंकी टोली स्थित आदर्श बाल विद्यालय की है, जहां पर प्रिंसिपल ज्ञानेश्वर त्रिपाठी यानि के के मेनन पूरी ईमानदारी से स्कूल को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं. स्कूल में फंड की कमी, टूटी-फूटी सुविधाएं और पढ़ाई में कम रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स जैसे कई पहलू हैं जिनसे अभी परेशान हैं.
इसी दौरान जिला शिक्षा अधिकारी ये घोषणा करते हैं कि दसवीं बोर्ड में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले स्कूल के प्रिंसिपल को कैम्ब्रिज (इंग्लैंड) जाने का मौका मिलेगा. इसी के चलते विदेश जाने का सपना देखने वाले ज्ञानेश्वर पूरी ताकत से स्टूडेंट्स और टीचर को बेहतर रिजल्ट दिलाने में जुट जाते हैं. लेकिन ये उनके लिए उतना आसान नहीं होता. क्योंकि वहां के विधायक, पॉलिटिक्स और सिस्टम उनके इस काम में रूकावट पैदा करते हैं. आगे क्या होता है? इसके लिए आपको ये पूरी सीरीज देखनी होगी.
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Adarsh Baal Vidyalaya Review in Hindi
आदर्श बाल विद्यालय सीरीज में क्या है खास?
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसका हल्का-फुल्का अंदाज है. एजुकेशन सिस्टम जैसे गंभीर विषय को बिना भाषण दिए मनोरंजक तरीके से दिखाया गया है. कई सीन्स आपको हंसाते हैं तो कई बार ये आपको सोचने पर मजबूर भी करते हैं. हर एपिसोड में कुछ नया देखने को मिलता है, जिससे बोरियत महसूस नहीं होती.
परफॉरमेंस की बात करें तो के के मेनन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे किसी भी किरदार में जान डाल सकते हैं. उनकी ईमानदार और इमोशनल एक्टिंग पूरी सीरीज को बेहतर बनाती है. इनके अलावा प्रसन्ना बिष्ट, अभिमन्यु सिंह, नवीन कस्तूरिया, देवेन भोजानी, अर्चना पूरन सिंह, प्राची शाह पंड्या के साथ-साथ बाकी स्टार्स ने भी अपने-अपने किरदारों में बेहतर काम किया है.
सीरीज की सिनेमैटोग्राफी और सरकारी स्कूल के माहौल दोनों काफी अच्छे लगे हैं. देखने में ये बिलकुल वास्तविक लगते हैं. बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के साथ ठीक बैठता है. एडिटिंग भी काफी तेज है, जिससे कहानी की स्पीड बनी रहती है.
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कहाँ कमी रह गई?
मुद्दा सही है लेकिन सीरीज में कई बार घटनाएं नजर आती हैं जोकि जरूरत से ज्यादा फिल्मी लगती हैं और रियलिटी से मेल नहीं खातीं. अगर कहानी को थोड़ा और जमीन से जुड़ा रखा जाता, तो इसका असर और भी ज्यादा होता. बैकग्राउंड स्कोर ठीक है लेकिन म्यूजिक कुछ खास नहीं है. गाने ज्यादा याद नहीं रहते. अगर ये गाने सीरीज में ना होते तो इसके मनोरंजन पर कोई फर्क नहीं पड़ता. बल्कि ये और भी ज्यादा मजेदार लग सकती थी.
फाइनल वर्डिक्ट
‘आदर्श बाल विद्यालय’ एक ऐसी वेब सीरीज है जो सरकारी एजुकेशन सिस्टम पर व्यंग्य करते हुए भरपूर एंटरटेन करती है. कहानी में कुछ कमियां जरूर हैं लेकिन स्टार कास्ट की परफॉरमेंस और हल्की फुलकी कॉमेडी आपको बोरियत महसूस नहीं होने देगी.
आपकी राय?
क्या आपको लगता है कि ‘आदर्श बाल विद्यालय’ में दिखाई गई सरकारी स्कूलों की स्थिति आज भी कई जगह वैसे ही है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं.