The Pyramid Scheme Review in Hindi: टीवीएफ (TVF) ने हमेशा से ही मिडिल क्लास भारतीय घरों की कहानियों को बेहद खूबसूरती से पेश किया है, लेकिन इस बार उनकी नई वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ (The Pyramid Scheme) एक ऐसे टॉपिक के साथ आई है जो बेहद ही गहरा और दर्दनाक है. हरिद्वार की पृष्ठभूमि पर बनी यह सीरीज मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) के काले सच को एक कॉमेडी के तौर पर दर्शकों के सामने दिखाने की कोशिश करती है.
The Pyramid Scheme Storyline in Hindi: द पिरामिड स्कीम की कहानी
सीरीज हरिद्वार के गोलडी यानि परमवीर सिंह चीमा की कहानी है. एक गरीब मिडिल क्लास फॅमिली का यह लड़का ‘जंबोलाइफ’ नाम की एक कॉरपोरेट कंपनी के जाल में फंसकर खुद भी एक घोटालेबाज बन जाता है. वह एक म्यूजिक टीचर मनोज यानि रणवीर शौरी को अपनी टीम में शामिल करता है और फिर शुरू होता है छात्रों, गृहिणियों, रिटायर सरकारी अधिकारियों और मासूम युवाओं को ठगने का एक बड़ा सिलसिला.
गोलडी और मनोज इस तरह से जाल बिछाते हैं कि लोग अपनी जीवन भर की कमाई एक ऐसी योजना में निवेश कर देते हैं जो असल में सिर्फ एक ‘ब्लैक होल’ है और इससे बाहर निकलना नामुमकिन है. खैर, सीरीज में ये सब कैसे होता है और आखिर में क्या होगा? ये सब जानने के लिए आपको ये पूरी सीरीज देखनी होगी. इस सीरीज के लगभग 7 एपिसोड हैं और हर एपिसोड लगभग 40 मिनट का है.
The Pyramid Scheme Watch Full Trailer
The Pyramid Scheme Review in Hindi
द पिरामिड स्कीम के प्लस पॉइंट्स
कास्ट की एक्टिंग: इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टार-कास्ट है. ‘चमक’ फेम परमवीर सिंह चीमा ने गोलडी के किरदार में गजब का आत्मविश्वास और चालाकी दिखाई है. उन्होंने दिखाया है कि कैसे एक इंसान अपनी ही झूठ पर भरोसा करने लगता है.
वहीँ दूसरी ओर एक टीचर से एक लीडर बनने तक का रणवीर शौरी का सफर देखने लायक है. जब भी पटकथा कमजोर होती है, तब भी रणवीर अपनी एक्टिंग से सीन में जान डाल देते हैं. इन सब के अलावा शेखर सुमन के पास रोल छोटा था, लेकिन उन्होंने अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से उसे प्रभावी बनाया. विजय कुमार, स्मिता बंसल और रवि बहल ने भी अपने-अपने किरदारों को बखूबी निभाया है.
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द पिरामिड स्कीम के नेगेटिव पॉइंट्स
नैतिकता की कमी: सभी जानते हैं कि एक समय पर ये चैन बनाने का बिज़नेस काफी चल रहा था और इसकी वजह से कितने घर बर्बाद हुए. लेकिन सीरीज में इसे कोई हास्य के तौर पर लिया गया और कोई बड़ा अपराध नहीं बताया गया है.
ट्रैक से भटकी हुई: सीरीज का मिजाज बार-बार बदलता है. कभी यह फैमिली कॉमेडी लगती है, तो कभी अचानक ‘आश्रम’ जैसी यानि कि ‘बाबा निराला’ वाली वाइब लाती है. यह दोहरापन कहानी को कहीं का नहीं छोड़ता.
पीड़ितों को अनदेखा करना: सीरीज का फोकस सिर्फ और सिर्फ ठगों को दिखाना है बल्कि इनके द्वारा कितने घर बर्बाद हुए और लोगों को कितनी मुसीबतें उठानी पड़ी, सीरीज में इस पर ज्यादा गौर नहीं दिया गया. ठगी और धोखाधड़ी को एक ‘सफलता की कहानी’ की तरह दिखाना इस सीरीज का सबसे बड़ा नेगेटिव पॉइंट है.
निष्कर्ष
‘द पिरामिड स्कीम’ एक बेहतरीन अवसर को गंवा देने वाली सीरीज है. इसके पास एक शानदार कास्ट थी लेकिन कमजोर कहानी की वजह से मेकर्स उनका भरपूर फायदा नहीं उठा पाए. अगर आपको कॉमेडी पसंद है तो आपको ये बीच-बीच में जरूर हंसाएगी लेकिन सीरियस सीन्स में भी कॉमेडी, ये सही नहीं है.
Special Request:
दोस्तों, क्या आपको लगता है कि किसी गंभीर आर्थिक अपराध (Fraud) को कॉमेडी की तरह दिखाना सही है? क्या रणवीर शौरी और परमवीर सिंह चीमा के अभिनय के लिए आप ‘द पिरामिड स्कीम’ देखना पसंद करेंगे, या आप इसे एक ‘मिस-अवसर’ मानते हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.