Peddi Movie Review in Hindi: राम चरण की कड़क परफॉरमेंस लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट ने बिगाड़ा खेल

Peddi Movie Review in Hindi: मेगा पावर स्टार राम चरण और ‘उप्पेना’ फेम डायरेक्टर बुची बाबू सना की मोस्ट अवेयटेड फिल्म ‘पेड्डी’ (Peddi) आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. ‘गेम चेंजर’ के बाद राम चरण के फैंस को इस फिल्म से बहुत उम्मीदें हैं. फिल्म को एक बहुत बड़े पैमाने पर बनाया गया है और दर्शकों के सामने पेश किया है. लेकिन क्या वास्तव में फिल्म उतनी ही अच्छी है? आइये इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

Peddi Movie Storyline in Hindi: पेड्डी फिल्म की कहानी

कहानी आंध्र प्रदेश के एक सुदूर और पिछड़े गांव के रहने वाले पेड्डी यानि राम चरण की है, जो निचली जाति से ताल्लुक रखता है. गांव वालों के पास न तो कोई पहचान पत्र (ID Card) है और न ही वोट देने का अधिकार, जिसके कारण सरकार या नेता उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देते. गांव के पास से एक रेलवे लाइन गुजरती है, और अप्पलासूडी यानि कि जगपति बाबू सालों से कोशिश कर रहे हैं कि ट्रेन उनके गांव के पास सिर्फ एक मिनट के लिए रुके, ताकि ग्रामीणों का शहर आना-जाना आसान हो सके.

पेड्डी विजयनगर की एक गुड़ फैक्ट्री में काम करता है और वह क्रिकेट का एक जादुई खिलाड़ी है. वह शहर के रसूखदार रामबुज्जी यानि दिव्येंदु की टीम के लिए खेलता है. शहर में चुनावी सरगर्मी के बीच पेड्डी को अचियम्मा यानि कि जान्हवी कपूर से प्यार हो जाता है. जब रामबुज्जी के गुंडे चुनाव प्रचार के दौरान अचियम्मा के साथ बदतमीजी करने की कोशिश करते हैं, तो पेड्डी उनसे भिड़ जाता है.

इसके बाद पेड्डी, रामबुज्जी की आँखों में खटकने लगता है. इसी बीच, एक अखाड़ा चलाने वाले गौरनायडू यानि शिव राजकुमार, पेड्डी की खेल प्रतिभा को देखकर उसे कुश्ती की ट्रेनिंग लेने के लिए कहते हैं. पेड्डी को समझ आता है कि अपने गांव को पहचान दिलाने और ट्रेन रुकवाने का यही इकलौता जरिया है. इसलिए वह अपने इस मिशन में लग जाता है. आगे क्या होता है? जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी पड़ेगी.

Peddi Movie Watch Full Trailer

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Peddi Movie Review in Hindi

पेड्डी फिल्म के प्लस पॉइंट्स

राम चरण का वन-मैन शो: राम चरण ने फिल्म के लिए जो 3-4 महीने कुश्ती की कड़ी ट्रेनिंग ली थी, वह पर्दे पर साफ दिखती है. क्रिकेट के मैदान पर उनका स्वैग और अखाड़े में उनका रफ-एंड-टफ अंदाज ऑडियंस को पसंद आएगा. इमोशनल और मास सीन्स में उन्होंने शानदार काम किया है.

बेहतरीन डायरेक्शन: बुची बाबू सना ने फिल्म को बहुत बड़े पैमाने पर बनाया है. बोमन ईरानी के किरदार के जरिए पेड्डी के लिए जो बिल्ड-अप तैयार किया गया है, वह बेहतरीन है. कुछ स्पोर्ट्स सीक्वेंस और गांव वालों के भावुक कर देने वाले सीन्स थिएटर्स में तालियां बटोरते हैं.

सपोर्टिंग कास्ट: कन्नड़ सुपरस्टार शिव राजकुमार और जगपति बाबू के फिल्म में ज्यादा बड़े किरदार नहीं हैं लेकिन अपने छोटे से रोल में उन्होंने गहरी छाप छोड़ी है. रवि किशन और सोराज पॉप्स भी अपने किरदारों में ठीक लगे हैं, जबकि श्रुति हासन ने फिल्म में ग्लैमर का तड़का लगाया है.

सिनेमैटोग्राफी: आर. रथनावेलु की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है. उन्होंने गांव के विजुअल्स और खेल के मैदान को बहुत ही भव्यता के साथ कैमरे में कैद किया है.

 

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पेड्डी फिल्म के नेगेटिव पॉइंट्स

कमजोर स्क्रीनप्ले: फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी राइटिंग है. कहानी कागज पर जितनी दमदार लगती है, पर्दे पर उतनी ही बिखरी हुई महसूस होती है. उदाहरण के लिए, गांव वालों का ट्रेन रोकने के लिए रेलवे ट्रैक को उखाड़ देना ‘मास सीन’ बनाने की कोशिश थी, लेकिन परदे पर यह बेहद बचकाना लगता है.

आधा-अधूरा प्लॉट: फिल्म के फर्स्ट हाफ में जिस इलेक्शन को कहानी का मुख्य केंद्र दिखाया गया था, डायरेक्टर सेकंड हाफ में उसके नतीजों के बारे में बताना ही भूल जाते हैं. विलेन रामबुज्जी का किरदार अचानक फिल्म के बीच से गायब हो जाता है और प्री-क्लाइमेक्स में वह अचानक सुधर जाता है जोकि थोड़ा अजीब लगता है.

जान्हवी कपूर का किरदार: जान्हवी कपूर स्क्रीन पर बेहद खूबसूरत लगी हैं, लेकिन उनके किरदार को जिस तरह से ट्रीट किया गया है, उसकी सोशल मीडिया और एलीट ऑडियंस के बीच काफी आलोचना होना तय है. कमजोर राइटिंग के कारण जान्हवी का किरदार भी कमजोर लगा है और ना ही उन्हें उतना ज्यादा स्पेस दिया गया है.

कमजोर VFX और लेंथी फिल्म: फिल्म में कैसे बढ़िया सीन्स हैं जिन पर VFX दमदार होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उदाहरण के तौर पर रेलवे ट्रैक निकालने वाले सीन में इस्तेमाल किये गए वीएफएक्स बहुत ही घटिया स्तर के लगते हैं. फिल्म की लंबाई जरूरत से ज्यादा बड़ी महसूस होती है. ए.आर. रहमान का म्यूजिक भी एवरेज है.

निष्कर्ष

‘पेड्डी’ पूरी तरह से राम चरण के कंधों पर टिकी हुई फिल्म है. अगर आप राम चरण के कट्टर फैन हैं और आपको बड़े पर्दे पर भव्य एक्शन, कुश्ती के कड़क दांव-पेंच और कुछ चुनिंदा मास मोमेंट्स देखना पसंद है, तो आप इस फिल्म को देख सकते हैं. हालांकि, कमजोर स्क्रिप्ट और कई बेतुके बदलावों के चलते यह एक परफेक्ट फिल्म बनने से पीछे रह गई है. हालाँकि तेलुगु वर्जन में फिल्म अच्छी कमाई कर सकती है लेकिन बाकी लैंग्वेज में ऑडियंस जुटा पाना इसके लिए थोड़ा मुश्किल लग रहा है.

Special Request:

दोस्तों, रंगस्थलम’ के बाद राम चरण का यह देसी ग्रामीण अवतार आपको कैसा लगा? क्या आपको लगता है कि कमजोर राइटिंग के बावजूद राम चरण अपनी स्टारडम के दम पर ‘पेड्डी’ को बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर बना पाएंगे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें. जानकारी पसंद आई हो तो पोस्ट को शेयर करना ना भूले, धन्यवाद.

Founder & Author : My name is Deepak Giri & I am from New Delhi, India. Filmi FryDay is your one stop shop for everything Entertainment.

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